पलामूः झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दो दिनों के दौरे पर पलामू पहुंचे हैं. वे बिना सुरक्षा के ही दौरे पर गए हैं.
उन्होंने कहा है कि जब सुरक्षा वापस कर दी है, तो क्षेत्र के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अकेले ही आना था. सो चले आए.
सुरक्षा को लेकर विभाग के अधिकारी और झारखंड पुलिस के साथ बना जिच कब खत्म होगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बात पत्र के माध्यम से राज्य के पुलिस महानिदेशक को बता दी है. मेरा कोई व्यक्तिगत स्वार्थ तो है नहीं. जब उनके ही विभाग का एक अधिकारी सुरक्षा में लगी गाड़ी लौटाने के लिए पत्र लिखे, तो उनके पास बच क्या जाता है.”
डीजीपी से जवाब मिलने के बारे में उन्होंने कहा, “अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. एक मंत्री होने के नाते पुलिस अधिकारी को जवाब देना था. इससे पता चलता कि कहां पर गैप है. सोलह सुरक्षाकर्मियों के लिए सरकार से मिली तीन गाड़ियों की जगह हमने एक गाड़ी बढ़ाने को कहा था. इतना ही तो मामला था. हम अपने कार्य, दायित्य और अधिकार से वाकिफ हैं. इस तरह के मामले में कोई मंत्री, पुलिस महकमा के प्रमुख को ही तो पत्र लिखेगा. ये कैबिनेट में उठाने या सीएम को बताने का मामला नहीं है.”
संयुक्त सचिव लिखित में खेद प्रकट करें
उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव प्रशांत कुमार संयुक्त सचिव को लेकर चैंबर में आए थे. संयुक्त सचिव ने पत्र लिखने को लेकर खेद प्रकट किया. हमने कहा, पत्र लिखित तौर पर आपने दिया था, इसलिए खेद प्रकट भी लिखित तौर पर कर दीजिए. हम आपके विभागीय प्रमुख हैं. प्रोटोकॉल का ख्याल पहले ही रखना था.
क्यों लौटाई सुरक्षा और गाड़ियां
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात सरकारी गार्ड्स और गाड़ियों को पिछले दो जुलाई को लौटा दी है. इस बाबत उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक को एक पत्र भी भेजा है.
पिछले 13 दिनों से वह बिना सुरक्षा के ही चल रहे हैं.
वित्त मंत्री की सुरक्षा में तीन वाहन चल रहे थे. और उनकी सुरक्षा में 16 सुरक्षा कर्मी तैनात थे. इसे लेकर उन्होंने पुलिस मुख्यालय को एक पत्र लिखा था कि 16 सुरक्षाकर्मियों के लिए तीन गाड़ियां कम पड़ रही हैं. इसलिए एक और गाड़ी दी जाए.
इस बीच वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने मंत्री की सुरक्षा में लगी एक गाड़ी लौटाने के लिए मंत्री के पीएस को पत्र लिखा.
यह पत्र वित्त मंत्री को पत्र भेजा, जो उन्हें असहज कर गया.
इसके बाद उन्होंने कड़ा रुख दिखाते हुए सुरक्षा की सारी सुविधाएं लौटा दी. डीजीपी को लिखे पत्र में मंत्री ने उस पुलिस अधिकारी के भेजे पत्र की भी चर्चा की है.
वित्त मंत्री ने लिखा, “विभाग के संयुक्त सचिव के द्वारा मेरे आप्त सचिव को लिखा गया पत्र मेरे लिए शर्मिंदगी का विषय है. इसलिए मैं सुरक्षाकर्मी और गाड़ियां लौटा रहा हूं. “
इसके बाद दूसरा पत्र भी मंत्री ने डीजीपी को लिखा, जिसमें राज्य में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ करते हुए सुरक्षा के मामले में हठधर्मिता छोड़ने की जरूरत बतायी.
