रांचीः भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो मेंबर और झारखंड में एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी में दो जिलों के एसपी ने मोर्चा संभाला था. जबकि इस ऑपरेशन की निगरानी सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह औऱ आईजी अभियान नरेंद्र कुमार कर रहे थे.
पुलिस मुख्यालय में पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई कि सुरक्षा एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया.
पुलिस को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ टाटा मैजिक वाहन से धनबाद से गिरिडीह की ओर जा रहा है.
सूचना मिलते ही धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने तत्काल साझा ऑपरेशन शुरू किया.
मिसिर के साथ उसके चार सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 15 लाख का इनामी और बेसरा की दाहिना हाथ माना जाने वाला मोछू भी शामिल है.
टाटा मैजिक से गिरिडीह की ओर जाते हुए
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ टाटा मैजिक से गिरिडीह की ओर जा रहा है. धनबाद-गिरिडीह सीमा पर सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम ने घेराबंदी में देर नहीं की.
जैसे ही टाटा मैजिक वाहन वहां पहुंचा, जवानों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. पहचान की पुष्टि होते ही मिसिर बेसरा और उसके चारों साथियों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया.
ऑपरेशन इतना पुख्ता था कि पूरे अभियान के दौरान एक भी गोली चलाने की नौबत नहीं आई. गिरफ्तारी के दौरान टाटा मैजिक वाहन से 3 एके 47 राइफल, 8 मैगजीन और 288 गोलियां बरामद की गई.
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से संगठन ध्वस्त!
पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से उसके संगठन में लगभग आखिरी कील ठोंक दी गई है. मिसिर बेसरा लंबे समय से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों के संचालन का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना हुआ था. ।पूछताछ से संगठन के शेष नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और फंडिंग चैनल से जुड़े बड़े खुलासे हो सकते हैं.
