लोकसभा में बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया. साथ ही, विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
बिल पास होने से पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को संबोधित किया था.
राहुल गांधी ने पेपर लीक से जुड़े बिल पर 50 मिनट तक सदन में अपनी बात रखी. उन्होंने यह दावा किया कि गृहमंत्री ने दिल्ली में छात्रों पर फायरिंग के आदेश दिए.
इसके जवाब में जितेंद्र सिंह ने कहा, “राहुल जी कहते हैं कि गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री ने दिया और उसका प्रमाण भी नहीं दे पाए. गोली चलाने का आदेश मंत्री नहीं मजिस्ट्रेट, डीएम, एसडीएम देता है.”
उन्होंने आगे कहा, “राहुल को सार्वजनिक जीवन के अनुभव का भी अभाव है. गोली नहीं चली, टियर गैस का इस्तेमाल हुआ.”
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है.
जितेंद्र सिंह ने कहा, “सबसे पहले विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है. विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा. यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता.”
केंद्रीय मंत्री ने 21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता पर तंज कसा. उन्होंने कहा, “21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए. ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए. जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए. जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए.”
