झारखंड आंदोलन के अग्रणी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें पूरे राज्य में शिद्दत से याद किया जा रहा है और भावभीनी श्रद्धजांलि दी जा री है. इसी क्रम में पैतृक गांव नेमरा में शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया.
हेमंत सोरेन अपनी माता रूपी सोरेन और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ नेमरा पहुंचे हैं. वे वहां एक कार्यक्रम में लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण करेंगे. साथ ही विकास की कई योजनाओं का शिलान्यास भी करेगे.
इसस पहले हेमंत सोरेन ने रांची के मोराबादी स्थित आवास पर पहुंचकर अपने पिता और आंदोलन तथा राजनीति की बड़ी हस्ती शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी.
नेमरा के लुकैयाटांड़ में दिशोम गुरुजी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए हेमंत सोरेन भावुक दिखे. वे काफी देर तक पिता की प्रतिमा को निहारते रहे. इस दौरान उनन्होंने अपनी माता का हाथ थामे रखा.
हेमंत सोरेन ने एक संदेश में कहा है, “यह केवल प्रतिमा नहीं, बल्कि अपने महान पिता को एक पुत्र की श्रद्धांजलि है.”
वहीं गांडेय से जेएमएम की विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर कहा है कि ये केवल एक परिवार नहीं, बल्कि झारखंड के हर परिवार के लिए भावुक पल है.
महाजनी प्रथा के खिलाफ क्या बोले हेमंत
मौके पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के ने कहा कि उनके दादा सोबरन सोरेन एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने आदिवासियों के शोषण और महाजनी प्रथा के खिलाफ बिगुल फूंका था.
उन्होंने आगे कहा कि इसी लुकैयाटांड़ में महाजनों और सूदखोरों ने उनके विरोध से नाराज होकर उनकी हत्या कर दी थी। इस बलिदान के बाद उनके बेटे दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने गरीबों और आदिवासियों के हक-अधिकारों के लिए लंबा आंदोलन किया। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा.
उन्होंने कहा,” झारखंड राज्य बनाने के लिए काफी संघर्ष व आंदोलन किया. आज गुरुजी शिबू सोरेन हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हम सबको विशेषकर युवा पीढ़ियों को उनके संघर्ष, सादगी, बलिदान को अपनाने की जरूरत है.”
सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू
नेमरा में गुरुजी को श्रद्दांजलि देने बड़ी तादाद में ग्रामीण, पार्टी के कार्यकर्ता, कई विधायक, सांसद और सरकार के मंत्री भी पहुंचे हैं.
सभी ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर गुरुजी को श्रद्धांजलि दी और उनके संघर्ष, त्याग तथा झारखंड राज्य निर्माण में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को याद किया.
भारतीय राजनीति में लंबी पारी खेलने वाले झारखंड आंदोलन के पुरोधा, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन का पिछले साल चार अगस्त को 81 साल की उम्र में निधन हुआ था.
गुरुजी को पद्यम भूषण
मरणोपरांत उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है. वे झारखंड में तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे.
शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी-मूलवासी अधिकारों की लड़ाई के मजबूत हस्ताक्षर थे. महाजनी प्रथा के खिलाफ उनकी लड़ाई अमिट है.
दिशोम गुरुजी की याद में राज्य भर में श्रद्धांजलि सभाएं, रक्तदान शिविर, सर्वधर्म प्रार्थना और सरकारी, गैर सरकारी स्तर पर सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. जगह-जगह उनके कार्यकर्ता, समर्थक अपने नेता के संघर्षों को याद कर रहे हैं. राज्य और देश के कई प्रमुख राजनेताओं ने भी गुरुजी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया है.
