रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने बिना पासपोर्ट और वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने के मामले में दोषी ठहराये गये बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद नजमुल हवालदार की आपराधिक अपील खारिज कर दी है.
न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया था. ऐसे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत उसकी अपील सुनवाई योग्य नहीं है.
अदालत ने साथ ही आरोपी और दो अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को जल्द निर्वासित करने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने इस मामले में झारखंड सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर हुई देरी पर नाराजगी जतायी. साथ ही कोर्ट ने जल्द निर्वासित करने के लिए कदम उठाने को कहा है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले की प्रति झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों तथा केंद्र सरकार के गृह और विदेश मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है. संबंधित अधिकारियों को 25 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी.
साथ ही पुलिस अधीक्षक, साहिबगंज को राहुल और मोहम्मद सागर की भूमिका की जांच करने को कहा, जिन पर नजमुल को भारत लाने और काम दिलाने में मदद करने का आरोप है.
बिना पासपोर्ट भारत में प्रवेश
नजमुल हवलदार तलझारी रेलवे स्टेशन के पास से पकड़ा गया था. अदालत के आदेश के अनुसार, 24 फरवरी 2023 की रात साहिबगंज जिले के तलझारी रेलवे स्टेशन के पास एक संदिग्ध व्यक्ति के घूमने की सूचना पुलिस को मिली थी. पुलिस टीम ने बैंक ऑफ इंडिया के पास उसे पकड़ा. पूछताछ में उसने अपना नाम नजमुल हवालदार बताया और खुद को बांग्लादेश के बागेरहाट जिले का निवासी बताया. उसके पास पासपोर्ट और यात्रा संबंधी वैध दस्तावेज नहीं थे. उसने पुलिस को बताया था कि वह करीब एक महीने पहले एक व्यक्ति की मदद से भारत आया था और दिल्ली में कबाड़ का काम करता था. बाद में कथित तौर पर अपराध की दुनिया में शामिल होने के दबाव के कारण वह बांग्लादेश लौट रहा था.
दो साल की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना
विदेशी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था. इस मामले में पुलिस ने विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14A(b) और 14(c) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. बाद में नजमुल को धारा 14A(b) के तहत दोषी ठहराते हुए 19 जून 2024 को दो साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी गयी.
जुर्माना नहीं देने पर 15 दिनों के साधारण कारावास का भी प्रावधान किया गया. अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी ने 15 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट के सामने अपना अपराध स्वीकार किया था.
सजा पूरी होने के बाद भी नहीं हो सका निर्वासन
राष्ट्रीयता की पुष्टि और यात्रा दस्तावेजों की प्रक्रिया में देरी. राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नजमुल की सजा पूरी होने के बाद उसे एक मार्च 2025 को हजारीबाग स्थित विदेशी नागरिकों के होल्डिंग कैंप में भेजा गया था. उसका निर्वासन कराने के लिए विदेश मंत्रालय और बांग्लादेश के उप उच्चायोग से संपर्क किया गया. शुरुआत में उसके पते और नागरिकता की पुष्टि को लेकर समस्या सामने आयी. हालांकि, बाद में एक जुलाई 2025 के पत्र में बांग्लादेश के उप उच्चायोग ने उसका पता सत्यापित होने की जानकारी देते हुए जल्द प्रत्यावर्तन का अनुरोध किया था.
हजारीबाग के कैंप से फरार होने पर नया मामला
दो अन्य बांग्लादेशी महिलाओं के साथ पकड़ा गया था आरोपी. सरकारी पक्ष के अनुसार, नजमुल हवालदार दो अन्य बांग्लादेशी नागरिकों के साथ नौ जून 2025 को हजारीबाग के होल्डिंग कैंप से फरार हो गया था. बाद में तीनों को पकड़ लिया गया. इस मामले में हजारीबाग के लोहसिंघना थाना में कांड संख्या 88/2025 दर्ज किया गया.
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गयी. इसी लंबित मामले का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने कहा था कि सभी कानूनी कार्यवाही पूरी होने के बाद ही निर्वासन किया जा सकता है, जब तक अदालत कोई अलग आदेश नहीं देती.
