रांचीः झारखंड बीजेपी के नये प्रभारी गजेंद्र पटेल अपने पहले दौरे पर रांची पहुंचे हैं. उन्होंने कहा है कि पार्टी की प्राथमिकता में झारखंड प्रदेश अव्वल है. यहां भाजपा का संगठन मजबूती से काम करने वाला है.
सोमवार की सुबह रांची पहुंचने पर पार्टी के नेताओं ने प्रभारी का जोरदार स्वागत किया. पार्टी के सह प्रभारी सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह भी रांची दौरे पर आए हैं.
रांची पहुंचने के बाद बीजेपी प्रभारी और सह प्रभारी बिरसा मुंडा की जन्म स्थली उलिहातू पहुंचे. साथ में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू , महामंत्री अमर कुमार बाउरी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा समेत अन्य कई नेता थे. उलिहातू में पांरपरिक तौर पर इन नेताओं का स्वागत किया गया.
उलिहातू में प्रभारी पटेल ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और धरती आबा के वंशजों से मिलकर उनका सम्मान किया.
गजेंद्र पटेल ने खूंटी में पार्टी के वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा से भी मुलाकात की और आशीर्वाद लिया. वे कड़िया मुंडा के घर पहुंचे थे.

इससे पहले रांची एयरपोर्ट पर भी गजेंद्र पटेल का भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया.
रांची में मीडिया से पटेल ने कहा, “झारखंड हमारे देश का प्रमुख हिस्सा है. लंबे समय से यहां पर जो आदिवासी क्षेत्र हैं उसके विकास के लिए पीएम मोदी और भाजपा सरकार ने काम किया है. हमारी प्राथमिकता में झारखंड प्रदेश अव्वल है. विकसित भारत में झारखंड की प्राथमिकता भी तय होगी. भाजपा का संगठन मजबूती से काम करने वाला है.”
उलिहातू से वापस रांची लौटने के बाद पार्टी प्रभारी की रांची स्थित कार्यालय में विभिन्न स्तरों पर बैठक होगी. पार्टी की गतिविधियों और राज्य में मौजूदा राजनीति से उन्हें अवगत कराया जाएगा.
कौन हैं गजेंद्र पटेल
भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में आदिवासियों के लिए रिजर्व खरगोन रिजर्व सीट से सांसद गजेंद्र पटेल को झारखंड बीजेपी का नया प्रभारी नियुक्त किया है. इससे पहले लक्ष्मीकांत वाजपेयी झारखंड में बीजेपी के प्रभारी थे.
सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह को झारखंड में सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
गजेंद्र पटेल की नियुक्ति को झारखंड में संगठन और खासकर आदिवासी इलाके में खिसकी जमीन को मजबूत करने तथा रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
51 साल के पटेल मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के रहने वाले हैं. वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं.
2019 में वे पहली बार चुनाव जीते. इसके बाद 2024 में भी उन्होंने जीत दर्ज की. इससे पहले वे भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुके हैं.
वे मध्य प्रदेश के प्रमुख आदिवासी भिलाला समाज से आते हैं, जो मुख्य रूप से भील जनजाति का ही एक उप-समूह माना जाता है. मध्यप्रदेश में पार्टी की अनुसूचित जनजाति मोर्चा के वे अध्यक्ष भी रहे हैं.

आदिवासी हाथों में संगठन की कमान
गौरतलब है कि झारखंड में बीजेपी नेतृत्व की नजर आदिवासी इलाकों में अपनी खोयी जमीन वापस पाने पर है. 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में आदिवासी इलाकों में हुई करारी हार की वजह से पार्टी ने पहले सत्ता गंवाई और दोबारा वापसी में विफल रही. विधानसभा में आदिवासियों के लिए रिजर्व 28 में से सिर्फ एक सीट सरायकेला भाजपा के पास है, जहां से चंपाई सोरेन विधायक है.
अलबत्ता 2024 के लोकसभा चुनाव में भी आदिवासियों के लिए रिजर्व सभी पांच सीटों पर जेेमएम- कांग्रेस ने जीत दर्ज की. अर्जुन मुंडा, सुदर्शन भगत, समीर उरांव, गीता कोड़ा सरीखे नेता चुनाव हारे. पार्टी के लिए यह बड़ा सेटबैक है.
दूसरी तरफ राज्य में हेमंत सोरेन आदिवासियों के बीच सर्वमान्य के साथ एक बड़े कद के नेता के तौर पर उभरे हैं. बीजेपी नेतृत्व को भी यह बखूबी पता है कि हेमंत सोरेन ने झारखंड में पार्टी के नेताओं को थका कर रख दिया है.
बदली राजनीतिक परिस्थितियों में बीजेपी नेतृत्व ने संगठन महामंत्री की कमान भी आदिवासी नेता और कुशल संगठक माने जाने वाले पवन साय को सौंपी है.
छत्तीसगढ़ के रहने वाले संगठन महामंत्री पवन साय ने भी शुक्रवार को रांची में अपना कार्यभार संभाल लिया है.
उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर प्रदेश की राजनीति और बीजेपी की गतिविधियों की जानकारी ली है.
उन्होंने कहा कि चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए काम करना है. साथ ही उन्होंने नेताओं को लामबंद करने के लिहाज से नारे भी दिए हैं- ‘हमरे जितब’ (हम जीतेंगे).
देखना बाकी होगा कि पवन साय और गजेंद्र पटेल झारखंड में किन स्तरों पर और कैसे संगठन पर धार चढ़ाकर, आदिवासियों का विश्वास जीतकर, जमीनी कार्यकर्ताओं की पहचान कर सत्ता मे वापसी की राह तय करते हैं.
