रांचीः खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के लोकसभा और राज्यसभा में पारित होने पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संकेत दिया है कि जल्द ही सरकार इस बिल के विरोध में विधानसभा विशेष सत्र बुला सकती है.
सोमवार की रात कैबिनेट की बैठक के बाद छात्रों के आंदोलन के बीच जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस बिल के खिलाफ है.
इससे पहले भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बिल पर कड़ा एतराज जताया है. साथ ही इसे काला बिल करार दिया है.
उन्होंने कहा है कि अगर केंद्र सरकार ने यह काला बिल वापस नहीं लिया तो झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा.
इस सवाल पर गुरुवार को उन्होंने जेएमएम के सभी जिलों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ चर्चा की थी. जेएमएम पार्टी स्तर पर इस बिल का विरोध करने की तैयारी में जुटा है. जिला स्तर पर पार्टी में बैठकों का दौर शुरू है.
जानकारी के मुताबिक इन बैठकों में आंदोलन की रुपरेखा तय की जा रही है.
हेमंत सोरेन ने चेताया है कि खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की, तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?
हेमंत सोरेन ने इस मसले पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को विस्तार से पत्र भी लिखा है. इसमें झारखंड के हक-अधिकार के साथ संभावित नुकसान की चर्चा की है.
हेमंत सोरेन का जोर इन बातों पर है कि खनिज हमारी धरती पर , तो झारखंड को उसका हक क्यों नहीं मिले. कोयले का रॉयल्टी पर राज्य सरकार की कोयला कंपनियों पर 1,36 लाख करोड़ की दावेदारी पर गतिरोध लंबे समय से वैसे ही कायम है.
बीजेपी का पलटवार
इधऱ झारखंड में कांग्रेस ने भ इस बिल का विरोध करना शुरू किया है. नेताओं की लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. दूसरी तरफ बीजेपी सत्तारूढ़ दलों के इस विरोध को राजनीतिक स्टंट करार दे रही है.
इन सबके बीच गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने खनन रॉयल्टी का मुद्दे पर कहा है, “ये कानून हमने तो नहीं बनाया ना जो ये एक्ट है ये एक्ट 1956-1957 का है ये नेहरू जी ने बनाया है. उसमें कहा कि मेजर मिनरल अलग होगा और माइनर मिनरल अलग होगा. मेजर मिनरल का जो अधिकार है वो भारत सरकार का होगा. चाहे वो कोयला का सवाल या बॉक्साइट का सवाल हो या चाहे मायका का सवाल हो या किसी का भी सवाल हो. तो जब ये कानून नेहरू जी ने बनाया जो आज तक वही चल रहा है अब उसमें क्या है कि स्टेट को रॉयल्टी मिल गई है.”
उन्होंने आगे कहा, “अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक तय हो गया कि शेष आप तय करेंगे. अब जो भारतीय जनता पार्टी के शासित राज्य हैं केवल खनन ऐसा नहीं है कि झारखंड में है ओडिशा में भी है छत्तीसगढ़ में है और महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में भी है सभी जगह है तमिलनाडु में भी है वहां पर लिग्नाइट है. तो वो सभी राज्य हैं उनको अपने क्षेत्र का विकास करना है और खासकर कोयला जो कि पीएम मोदी का एक वादा है कि 2070 तक वो जीरो कार्बन हो जाएगा. मतलब हम कोयला का उपयोग नहीं करेंगे. ये भारत ने दुनिया में वादा किया है.”
बीजेपी सांसद का आरोप है, “इनको (झारखंड सरकार) भष्ट्राचार करना है ये इसका 1200-1500 वसूलते हैं अगर कोयला ओडिशा, छत्तीसगढ़ का सस्ता मिलेगा तो लोग वही जाएंगे. सेस लगाने की एक स्थितियां होती हैं आप इससे ज्यादा सेस नहीं लगा सकते हैं वहीं ये एक्ट है झारखंड के लोगों को बचाने के लिए, रोजगार देने के लिए, झारखंड के लोगों को पलायन का शिकार नहीं होना पड़े इसके लिए पीएम मोदी ने कानून बनाया अब वो लड़ाई करे लें तो इससे क्या फर्क पड़ेगा. रॉयल्टी भी बंद हो जाएगी और सेस भी बंद हो जाएगा. तो इनके पास पेट्रोल-डीजल भराने के पैसे नहीं होगा. करे लें ये जितना आंदोलन करना है 1 महीना, 2 महीना साल भर हम भी उस आंदोलन भी साथ देंगे इसके बाद न रॉयल्टी मिलेगा न सेस मिलेगा. इसके बाद हेमंत सोरेन जी झारखंड वासियों को कंगाल करने के अलावा क्या तोफा देंगे. वो यही तोफा देने चाहते हैं.”
मिनरल मैप पर झारखंड
गौरतलब है कि देश के मिनरल मैप में झारखंड का स्थान बेहद अहम है. देश के मिनरल रिजर्व और कोयले के भंडार का एक बड़ा हिस्सा इसी राज्य में है. और खनन तथा उत्खनन (Mining and Quarrying) सेक्टर के जरिए यह जीएसवीए (GSVA) में अहम योगदान देता है. कोयले के भंडार, आयरन-ओर, कॉपर और बॉक्साइट के मामले में झारखंड सबसे आगे है.
झारखंड विधानसभा ने ‘झारखंड मिनरल-बेयरिंग लैंड सेस बिल 2024’ पास किया था, जिसमें अलग-अलग खनिजों पर प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से अलग-अलग दर से टैक्स लगाने का प्रावधान है. 2025 के बजट सत्र में इस कानून में और संशोधन किया गया ताकि खनन किए गए खनिजों पर सेस को चार गुना तक बढ़ाया जा सके.
अब केंद्र में एमएमडीआर पर संशोधन विधेयक के पास होने से खनिजों और खनिज धारित भूमि पर राज्य सरकारें अतिरिक्त कर, उपकर (सेस) या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी.
