भारत सरकार ने अवैध आप्रवास और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने तथा उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है.
समिति के अध्यक्ष प्रकाश प्रभाकर नावलेकर होंगे. समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा दुर्गा शंकर मिश्रा, बालाजी श्रीवास्तव और शमिका रवि सदस्य के रूप में शामिल होंगे.
गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (Foreigners-I) समिति के सदस्य सचिव होंगे. समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी और आवश्यकता पड़ने पर गृह मंत्रालय इसके कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ा सकता है.
अमित शाह ने बताया राष्ट्रीय चुनौती
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाला अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है. यह समस्या केवल राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक संरचना और जनजातीय समाज के संरक्षण से भी जुड़ी हुई है.”
समिति करेगी व्यापक अध्ययन
सरकार के अनुसार, यह समिति अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी। समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का भी विश्लेषण करेगी। इसके साथ ही समिति इन परिवर्तनों के कारणों, सीमा पार गतिविधियों, आर्थिक अवसरों और सामाजिक-पर्यावरणीय कारकों का अध्ययन करेगी।
केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय
समिति अवैध आप्रवास और उससे उत्पन्न जनसांख्यिकीय असंतुलन से जुड़े मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के लिए व्यापक नीतिगत ढांचा भी तैयार करेगी. सरकार ने कहा कि समिति जरूरत पड़ने पर अन्य उपयुक्त उपायों की सिफारिश भी कर सकेगी.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ की घोषणा की थी, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर 2025 को मंजूरी दी थी.
