झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में भोजपुरी, मगही, अंगिका सहित क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल करने की मांग पर नए सिरे से विचार/अध्ययन करने के लिए सरकार ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है.
यह समति भाषा संबंधी मामलों पर विचार/अध्ययन करने के पश्चात नियमावली में जनजातीय/ क्षेत्रीय भाषा को सम्मिलित या विलोपित करने के बिंदु पर अनुशंसा करेगी.
कार्मिक प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इस कमेटी में श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार को शामिल किया गया है.
इस अधिसूचना के अनुसार समिति की बैठकों के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को नोडल की जिम्मेदारी दी गई है. सरकार के उप सचिव ब्रज माधव के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के अनुसार समिति यथाशीघ्र अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को समर्पित करेगी.
हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल ने बहुप्रतीक्षित ‘शिक्षक पात्रता नियमावली ( जेटेट) 2026 को हाल ही में अपनी स्वीकृति दे दी है. इस नियामवली में भोजपुरी, अंगिका और मगही भाषा को परीक्षा की सूची से बाहर ही रखा गया है.
इससे पहले भोजपुरी, अंगिका और मगही भाषा को नियमावली में शामिल नहीं करने पर मंत्री दीपिका सिंह पांडेय और राधाकृष्ण किशोर ने आपत्ति जतायी थी.
कांग्रेस कोटा के दोनों मंत्रियों ने तब कहा था कि नियमावली में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल नहीं किये जाने से अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं होगा. इसलिए कि पलामू में भोजपुरी और मगही बोली जाती है. तथा संताल परगना के गोड्डा इलाके में अंगिका भाषा प्रचलित है.
