रांची : बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट पर बना निम्न दबाव का क्षेत्र झारखंड की ओर बढ़ रहा है. इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है. इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है.
रांची में मंगलवार की सुबह से लगातार बारिश हो रही है. शहर के कई इलाकों में जलजमाव का नजारा है.
रांची के गौंदा और गेतलसूद डैम में पानी खतरे के निशान तक पहुंच गया है.
उधर जमशेदपुर के निचले इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है.
इस बीच मौसम विभाग ने एक सितंबर को रांची समेत राज्य के लगभग सभी स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना जताई है.
इन जिलों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग का अनुमान है कि गढ़वा, पलामू, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है.
वहीं, दो, तीन और चार सितंबर को भी राज्य के कुछ स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है. पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई. सबसे अधिक 171 मिमी बारिश लातेहार के महुआडांड में दर्ज की गयी है. इसके अलावा डुमरिया में 112.2 मिमी, मझगांव में 95.4 मिमी, चाकुलिया में 92.4 मिमी और मुसाबनी में 80.2 मिमी बारिश हुई. वहीं, लोहरदगा में 41 मिमी, जमशेदपुर में 49 मिमी और चाईबासा में 29.3 मिमी बारिश दर्ज की गयी.
इधर, सोमवार को राजधानी रांची में दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही. देर शाम भी बारिश का सिलसिला जारी रहा. रांची में करीब 13 मिमी बारिश दर्ज की गयी.
मंगलवार की सुबह से होती बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है.
जमशेदुर में बाढ़ का खतरा
जमशेदपुर: शहर में लगातार हो रही बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण जमशेदपुर में दोनों प्रमुख नदियों खरकई और स्वर्णरेखा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है.
बाढ़ नियंत्रण कोषांग की सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, खरकई नदी खतरे के निशान से 2.52 मीटर ऊपर बह रही है, जबकि स्वर्णरेखा नदी भी खतरे के निशान खतरे के निशान (121.50 मीटर) को पार कर 121.58 मीटर पर पहुंच गयी है.को पार कर चुकी है.
चांडिल डैम और गालूडीह बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण तटीय और निचले इलाकों में जलजमाव व बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है.
निचले इलाकों में अलर्ट
कदमा (शास्त्रीनगर, रामनगर), बागबेड़ा (नया बस्ती, बड़ौदा घाट), जुगसलाई, मानगो और भुइयांडीह के नदी किनारे बसे इलाकों में पानी प्रवेश करने की आशंका को देखते हुए प्रशासन सतर्क है.
चांडिल डैम से लगातार पानी छोड़े जाने और गालूडीह बराज के 9 गेट खोले जाने से धालभूमगढ़, बहरागोड़ा और चाकुलिया के तटीय क्षेत्रों में भी पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर जाने तथा स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गयी है.
दामोदर-बराकर समेत कई नदियां उफान पर
लगातार बारिश का असर हजारीबाग, गिरिडीहस बोकारो और रामगढ़ जिले की प्रमुख नदियों पर भी दिखाई देने लगा है. दामोदर, बराकर, कोनार और लारा समेत कई नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है.
पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण छोटे-बड़े नदी-नालों में भी उफान आ गया है. लारा और सवाने नदी के आसपास के मैदानी एवं निचले इलाकों में पानी फैलने की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
लोगों से कहा गया है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी और नालों के आसपास जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन को सूचना दें.

पलामू में भी लगातार बारिश
पलामू जिले में पिछले 36 घंटे से लगातार बारिश हो रही है. उत्तरी कोयल समेत कई छोटी बड़ी नदियां उफान पर है. पलामू प्रमंडल के मुख्यालय मेदिनीनगर के निचले इलाकों में एक बार फिर से पानी भर गया है.
सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है. सोन नदी की सहायक नदी उत्तरी कोयल भी उफान पर है. सोन नदी में बढ़ते जल स्तर को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है.
पलामू पुलिस के द्वारा तटवर्ती क्षेत्र में लगातार माइकिंग करवाई जा रही है और लोगों से नदी से दूर रहने का आग्रह किया जा रहा है. सोन के डीला पर रहने वाले लोगों को नदी जाने से मना किया गया है.
