रांचीः झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान जारी है. एनडीए और सत्तारूढ़ दलों ने अपने विधायकों को इंटैक्ट रखने व एक- दूसरे के चक्रव्यूह को भेदने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रखी है.
राजनीतिक गहमी और सियासी दांव-पेच के बीच अब से कुछ देर पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी, जेएमएम विधायक कल्पना सोरेन वोट देने के लिए विधानसभा पहुंचे हैं.
इससे पहले सत्तारूढ़ दलों- जेएमएम, कांग्रेस, राजद, माले के विधायक एक साथ बस पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे. उधर होटल रेडिसन ब्लू में दो दिनों से डेरा डाल रखे एनडीए के विधायक भी एक साथ बस पर सवार होकर मतदान में भाग लेने विधानसभा पहुंचे.
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में जेएमएम के 34 विधायक हैं. प्रथम वरीयता में जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत होगी. जाहिर तौर पर जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत कंफर्म मानी जा रही है.
दूसरी सीट के लिए एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमलन नथवाणी और सरकार में सहयोगी कांग्रेस के प्रणव झा के बीच सीधा मुकाबला है.
क्या है अंकगणित और कहां पर है पेच
परिमल नथवाणी पहले भी झारखंड से दो बार राज्यसभा का सांसद रहे हैं और सत्तारूढ़ दलों के अलावा विपक्ष दोनों खेमे के समीकरणों को साधने का हुनर भी जानते हैं.
इसके अलावा बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व तक उनकी सीधी पहुंच है.
एनडीए में 24 विधायक हैं. जीत के लिए प्रथम वरीयता में 28 वोट की जरूरत होगी. एनडीए के सभी 24 विधायकों के वोट हासिल करने के बाद भी नथवाणी को और चार वोट जुगाड़ने हैं.
सियासी गलियारे में चर्चा जोरों पर है कि सत्तारूढ़ दलों में वे सेंध लगाने की रणनीतिक बिसात के साथ ही यहां चुनाव लड़ने आए हैं. हालांकि, उनका यह हुनर नए सिरे से आजमाया जाना है.
सत्तारूढ़ दलों के पास 56 विधायक हैं. एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों के वोट चाहिए होगी. अगर सत्तारूढ़ दल दोनों सीटों पर इंटैक्ट होकर लड़े, तो दोनों सीटें जीत सकते हैं.
हालंकि जोड़-तोड़ की इस चुनावी राजनीति में जेएमएम उम्मीदवार की जीत कंफर्म है. इसलिए कि जेएमएम के पास 34 विधायक हैं.
परिमल नथवाणी की रणनीति से पार पाने के लिए कांग्रेस भी हर कोशिशों में जुटी है कि सहयोगी दलों के 12 वोट उसे मिल जाए. साथ ही कांग्रेस के सबी 16 विधायक भी एकजुट रहें.
सहयोगी दलों में राजद के पास 4 और भाकपा माले के 2 विधायक हैं.
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के एक विधायक जयराम कुमार महतो ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं, पर राजनीतिक गलियारे में कयासों का दौर जारी है कि वे नथवाणी के समर्थन में जा सकते हैं.
बीजेपी की रणनीति के मद्देनजर महागठबंधन के विधायकों को हेमंत सोरेन ने गोलबंद किया है.
साथ ही प्रथम वरीयता और द्वितीय वरीयता का वोट कैसे गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों की जीत तय करेगा, इसकी भी रणनीति तय की गई है.
अगर गठबंधन के विधायक एकजुट रहे और क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, तो नथवाणी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी.
