झारखंड के आदिवासी बहुल खूंटी जिले के राजागढ़ स्थित छाता सरना मैदान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का जीवंत केंद्र बना, जहां कॉम्पाट मुंडा 12 मौजा धनवार बाबा किलि पड़हा जतरा का आयोजन पूरे उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया.
दूर-दराज के गांवों से पहुंचे महिला-पुरुष, युवा और पारंपरिक नृत्य दलों की मौजूदगी से पूरा मैदान सांस्कृतिक रंगों में रंगा नजर आया.
जतरा समारोह में मुख्य अतिथि शनिचाराय भेंगरा तथा विशिष्ट अतिथि अमृता मुंडा शामिल हुईं. आयोजन समिति ने अतिथियों, खोड़हा मंडलियों और समाज के लोगों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया. मांदर की गूंज, लोकगीतों की लय और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया। देर तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर चलता रहा और दर्शकों ने उत्साह के साथ सहभागिता निभाई.
समारोह के दौरान वक्ताओं ने पड़हा व्यवस्था की ऐतिहासिक भूमिका, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया. कहा गया कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं.
आयोजन समिति की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया कि जतरा का उद्देश्य पड़हा संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण-संवर्धन करने के साथ समाज में एकता और अनुशासन की भावना को मजबूत करना है.
इसी दौरान आयोजन स्थल पर शराब की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक रखी गई और सभी से अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई. कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से पहुंचे पारंपरिक नृत्य दलों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया गया. मौके पर एदेल संगा पड़हा महारानी अमृता मुंडा, सचिव विरेन्द्र धान, देवान दुबिया मुंडा, हेरेंज पड़हा कार्यवाही राजा हरीनाथ हेरेंज सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.
