रांची: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने हेमंत सोरेन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान (रिम्स-2) के निर्माण कार्य पर रोक लगाने को कहा है.
सुनवाई को दौरान आयोग ने रिम्स 2 के लिए रैयतों की अधिग्रहित जमीन के बारे में रिपोर्ट तलब की.
अधिकारियों ने रिम्स टू के लिए अधिगृहित की गई 222 एकड़ भूमि और रैयतों की सूची सौंपी. हालांकि अधिकारियों ने यह जानकारी नहीं दी कि अब तक कितने रैयतों को उनकी अधिगृहित भूमि के मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है.
आयोग ने कहा है कि जब तक आयोग के समक्ष इस मामले की सुनवाई चल रही है, तब तक किसी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाए.
आयोग की सदस्य डॉ आशा लकड़ा ने बताया है कि अनुसूचित जनजाति आयोग ने 15 शिकायतों पर सुनवाई की. इन शिकायतों में रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 का मामला भी शामिल है.
इसके अलावा गढ़वा, पलामू, रांची, बोकारो, जामताड़ा सहित कई जिलों से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान संबंधित जिलों के अधिकारी और शिकायतकर्ता भी शामिल रहे.
रिम्स-2 की जमीन अधिग्रहण की रिपोर्ट तलब
डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि रिम्स-2 के लिए जिस 222 एकड़ भूमि को लेकर आयोग को शिकायत मिली है, रांची के जिला प्रशासन और रेवेन्यू अफसर से उक्त 222 एकड़ जमीन की अधिग्रहण रिपोर्ट मांगी गयी है. रैयतों में से कितनों को मुआवजा मिला, जिन्हें मुआवजा मिला, उन्हें कितनी एकड़ का और कितना मुआवजा मिला है, ये सब जानकारी मांगी गई है.
उन्होंने कहा कि जब तक रिम्स-2 निर्माण से जुड़ी सुनवाई आयोग के समक्ष चल रही है, तब तक किसी तरह का कोई निर्माण कार्य नहीं करने को कहा गया है.
आयोग भी चाहता है कि रिम्स-2 बने, लेकिन किसानों की जमीन की जगह कोई और जगह पर बने. जनजाति समुदाय के उपजाऊ भूमि को लेकर अस्पताल बने, यह जरूरी नहीं है.
उन्होंने कहा कि गुमला, चैनपुर, डुमरी और अन्य दूरस्थ क्षेत्र में आज भी आने-जाने के लिए एंबुलेंस से लेकर डॉक्टर का अभाव है, वहां चिकित्सीय सुविधा बढ़े, इन मामलों में भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.
रांचीः झारखंड में हेमंत सोरेन कैबिनेट ने महत्वाकांक्षी राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स-2) के निर्माण के लिए 4189 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
कैबिनेट की स्वीकृति
गरतलब है कि बीते गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के ‘रिम्स-2’ (RIMS-2) निर्माण के लिए 4189 करोड़ रुपये की कैबिनेट ने मंजूरी दी है.
रिम्स-2 योजना के सुचारू संचालन और मॉनिटरिंग के लिए ‘जागृति पीएमयू’ (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया जाएगा जबकि आईआईएम (IIM) रांची इस परियोजना में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में काम करेगा. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के आकलन के लिए XISS रांची को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
