रांचीः झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव में विधायकों को इंटैक्ट रखने और वोट जुगाड़ने की रणनीति को लेकर सियासी हलचल तेज है. कांटे से कांटा निकालने का खेल चल रहा है.
इन सबके बीच होटल रेडिसन ब्लू से एनडीए विधायकों की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें सभी विक्ट्री साइन दिखा रहे हैं.
इसी पांच सितारा होटल में भाजपा और सहयोगी दलों के विधायकों को मंगलवार से ही ठहरने का इंतजाम किया गया है. हालांकि इस होटल पॉलिटिक्स को लेकर सत्तारूढ़ दलों ने बीजेपी की आलोचना भी की है.
एनडीए में विधायकों की संख्या 24 है. एनडीए के समर्थन से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार, उद्योगपति परिमल नथवाणी को और चार वोट जुगाड़ने हैं.
प्रथम वरीयता में जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत होगी.
इस तस्वीर को जारी करने के साथ झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है, “एनडीए विधायकों की आज रेडिशन ब्लू होटल वाली उत्साह से लबरेज यह तस्वीर देखकर कांग्रेसी खेमे में हताशा, बेचैनी और छटपटाहट मचना स्वाभाविक है. आज रात उन्हें नींद नहीं आने वाली है.”
साहू ने कहा है कि एनडीए के सारे विधायक एकजुट हैं और सभी विधायक परिमल नाथवानी के साथ मजबूती से खड़े हैं। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जीत सौ फीसदी तय है. साथ ही यह भी तय है कि विपक्षी खेमे के कई विधायक अंतरात्मा और राष्ट्रहित को देखते हुए वोट करेंगे.
क्या है अंकगणित और किन पर है नजर
गौरतलब है कि एक सीट झामुमो के संस्थापक अध्यक्ष शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है. दूसरी सीट पर भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा हो रहा है.
सत्तारूढ़ झामुमो ने बैजनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है.
इधर एनडीए के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार नथवाणी के खम ठोंकने से चुनावी बिसात बदल गई है. हालांकि उससे पहले बीजेपी अपने उम्मीदवार देने की आखिरी वक्त तक पैंतरेबाजी करती रही.
नथवाणी पहले भी झारखंड से दो बार राज्यसभा का सांसद रहे हैं और सत्तारूढ़ दलों के अलावा विपक्ष दोनों खेमे के समीकरणों को साधने का हुनर भी जानते हैं. इसके अलावा बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व तक उनकी सीधी पहुंच है.
जीत के लिए प्रथम वरीयता में 28 वोट की जरूरत होगी. एनडीए के सभी 24 विधायकों के वोट हासिल करने के बाद भी नथवाणी को और चार वोट जुगाड़ने हैं.
सियासी गलियारे में चर्चा जोरों पर है कि सत्तारूढ़ दलों में वे सेंध लगाने की रणनीतिक बिसात के साथ ही यहां चुनाव लड़ने आए हैं.
सत्तारूढ़ दलों के पास 56 विधायक हैं. एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों के वोट चाहिए होगी. अगर सत्तारूढ़ दल दोनों सीटों पर इंटैक्ट होकर लड़े, तो दोनों सीटें जीत सकते हैं.
हालंकि जोड़-तोड़ और तिलिस्म वाली इस चुनावी राजनीति में जेएमएम उम्मीदवार की जीत कंफर्म है. इसलिए कि जेएमएम के पास 34 विधायक हैं.
परिमल नथवाणी की रणनीति से पार पाने के लिए कांग्रेस भी हर कोशिशों में जुटी है. अगर सहयोगी दलों के 12 वोट उसे मिल जाए. और कांग्रेस के सभी 16 विधायक भी एकजुट रहें, तो प्रणव झा की गोटी भी लाल हो जाएगी.
सरकार में शामिल राजद के पास चार और भाकपा माले के दो वोट हैं और कांग्रेस के लिए ये वोट निहायत जरूरी है.
जेएलकेएम से जयराम कुमार महतो का भी एक वोट है. बीजेपी के कई विधायक और नेताओं का बयान सामने आया है कि जयराम भी नथवाणी को वोट देंगे. उनसे बात हो गई है.
हालांकि जयराम ने अब तक खुद स्पष्ट तौर पर पत्ते नहीं खोले हैं. वे घुमा-फिराकर बातें कर रहे हैं. लेकिन संकेत हैं कि आखिरी वक्त उनका वोट नथवाणी को जा सकता है.
हेमंत सोरेन की सीधी नजर
एनडीए की गतिविधियों और चाल को देखते हुए हेमंत सोरेन ने भी महागठबंधन के विधायकों को एकजुट रहने और सावधानी से वोट करने का मंत्र देते रहे हैं.
इसी सिलसिले में मंगलवार की रात हेमंत सोरेन और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू तथा राजद के महासचिव भोला यादव ने महागठबंधन के विधायकों के साथ होटल बीएनआर चाणक्या में बैठक कर रणनीति तय की थी.
इसके साथ ही पोलिंग को लेकर मोक टेस्ट भी लिया गया. इनमें जेएमएम को 29 तथा कांग्रेस को 27 वोट मिले.
अगर सहयोगी दल एकजुट होकर जेएमएम और कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट करते हैं, तो परिमल नथवाणी का जीतना मुश्किल होगा. लेकिन उन्हें वोट जुगाड़ने में माहिर माना जाता है. यही वजह है कि चुनाव में उनके उतरने से राजनीतिक खदबादहट बढ़ी हुई है.
