धनबादः झारखंड में हुए शहरी निकायों के चुनाव में सिर्फ धनबाद नगर निगम के मेयर के लिए वोटों की गिनती शनिवार देर शाम पूरी हुई. अपने दम पर चुनाव लड़ रहे झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने जीत का झंडा गाड़ दिया है.
संजीव सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी चंद्रशेखर अग्रवाल को 31,902 वोटों से हराया है. जबकि भाजपा समर्थित संजीव कुमार को तगड़ी पटखनी दी है. संजीव कुमार यहां चौथे नंबर पर हैं.
वोटों की गिनती में शुक्रवार को पहले राउंड में संजीव सिंह ने बढ़त हासिल की थी, वह सातवें राउंड तक कायम रही.
संजीव सिंह को रिकॉर्ड एक लाख 14 हजार 362 वोट मिले. उन्होंने झामुमो समर्थित चंद्रशेखर अग्रवाल को 82,460 वोट मिले.
तीसरे नंबर पर कांग्रेस समर्थित शमशेर आलम अंसारी को 59,079 वोट मिले. और चौथे नंबर पर भाजपा समर्थित संजीव कुमार को 57,895 वोट पर संतोष करना पड़ा.
यहां झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के युवा उम्मीदवार जो पेशे से इंजीनियर और टाउन प्लानर प्रकाश कुमार को 21,727 वोट लाकर पांचवें नंबर पर हैं.
पूर्व मेयर इंदु देवी को को 16,301 वोट मिले हैं और वे छठे नंबर पर रहीं.
संजीव सिंह अभी झरिया से बीजेपी विधायक रागिनी सिंह के पति हैं. संजीव सिंह की मां कुंती देवी भी बीजेपी से विधायक रही हैं.
संजीव सिंह के मेयर पद पर चुनाव जीतने से धनबाद की राजनीतिक बयार बदलेगी और समीकरण भी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता.
चंद्रशेखर अग्रवाल ने ठीक चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर झामुमो का दामन थामा था. जेएमएम के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में अग्रवाल ने झामुमो की सदस्यता लेकर हवा बदलने का प्रयास किया और पार्टी का समर्थन चुनाव में हासिल किया, लेकिन उनका भी दांव नहीं चला.
कार्यकर्ताओं, समर्थकों में उत्साह
संजीव सिंह के कार्यकर्ता, सिंह मेंशन के समर्थक बड़ी तादाद में मतगणना केंद्र के बाहर पहुंचे हैं. संजीव सिंह के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं. अबीर-गुलाल उड़ाये जा रहे हैं.
संजीव सिंह ने कहा है कि वे जनता के समर्थन से चुनाव लड़ रहे थे. पूरे प्रचार के दौरान भी उन्होंने इस बातों पर जोर दिया था.
गौरतलब है कि भाजपा ने धनबाद में पार्टी के नेता संजीव कुमार को समर्थन दिया था. संजीव कुमार की जीत तय करने के लिए धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो, विधायक राज सिन्हा समेत प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने भी अभियान को थाम रखा था.
हालांकि संजीव सिंह ने भी चुनाव से पहले पार्टी में अप्रोच किया था कि उन्हें मेयर पद से लड़ने की अनुमति के साथ समर्थन दिया जाए. लेकिन भाजपा ने उकी अनदेखी की. उधर भाजपा के नेता और पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने भी पार्टी के अंदरखाने उम्मीदवार के नाम पर चर्चा को मौके पर ताड़कर झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया.
राजनीतिक टसल और संजीव सिंह की बिसात
झामुमो ने चंद्रशेखर अग्रवाल को समर्थन भी दिया. पूर्व मेयर इंदु सिंह के अलावा रवि बुंदेला और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रकाश कुमार भी मैदान में उतरे. नामांकन के साथ ही धनबाद में मेयर का दंगल राजनीतिक टसल में बदल गया.
संजीव सिंह और उनके भाई सिद्धार्थ गौतम सलीके से चुनावी गोटियां बिछाते रहे. चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए दांव- पेंच भी चलते रहे. दोनों भाई अलग-अलग खेमों में धनबाद के हर इलाके और वार्ड में गए. लोगों से समर्थन मांगा. सवर्ण वोटों के समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिशें की, जो सफल होता दिख रहा है.
संजीव सिंह ने इस चुनाव में यह भी साबित किया कि भले ही आठ साल वे सलाखों के पीछे रहे हैं, पर अब भी चुनावी मोहरे बिछाना, समीकरणों को साधना और हवा का रुख भांपना वे बखूबी जानते हैं.
पूर्नीव मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आरोपी रहे संजीव सिंह के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी होने के बाद लोगों के बीच उन्हें सहानुभूति भी मिला, दरअसल वे इस केस में आठ साल तक जेल में रहे. केस- मुकदमे की लंबी लड़ाई लड़ी. स्वास्थ्य के लिहाज से भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा.
चुनाव के दौरान धनबाद से बीजेपी के सांसद ढुल्लू महतो ने भी संजीव सिंह को भाषणों और प्रचार में निशाने पर लिया रखा. संजीव सिंह ने इसका भी काट निकाला.
ढुल्लू महतो की तल्खियां ने सिंह मेंशन के समर्थकों को इस चुनाव में और भी इंटैक्ट कर दिया. उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और लोगों को गोलबंद करना शुरू किया. संजीव सिंह और उनके भाई सिद्धार्थ गौतम ने अलग-अलग खेमों में चुनावी मुहिम की अगुवाई की और विरोधियों को अच्छी खासी पटखनी दे डाली.
इस चुनाव में संजीव सिंह ने रणनीतिक तरीके से कोयला मजदूरों, कामगारों के साथ स्वजातीय वोटों तथा व्यवसायियों के एक तबका का समर्थन जुटाने में कामयाब होते दिख रहे हैं. जाहिर तौर पर उन्होंने अपने विरोधियों को भी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया है.
