रांचीः जमशेदपुर पश्चिम से जदयू के विधायक सरयू राय ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे विवाद को लेकर समझौते पर कहा है कि इससे झारखंड को एक लोटा भी अतिरिक्त पानी नहीं मिलेगा. जो पानी पहले झारखंड के हिस्से में आ रहा था, बस वही आएगा.
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच दिल्ली में हुए समझौते को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों के लिए किसानों के लिए सिंचाई और पीने का पानी तथा प्रगति को लेकर लाभकारी बताया है.
सरयू राय के सवाल
सरयू राय ने कहा कि झारखंड के हिस्से का 20 लाख एकड़ फीट पानी 1973 के बाणसागर समझौते में ही आवंटित हो चुका था. लिहाजा 31 अगस्त का समझौता नया जल आवंटन नहीं है. बाणसागर समझौते में अविभाजित बिहार को इंद्रपुरी बराज पर 7.75 एमएएफ पानी मिला था. इसमें 5 एमएएफ करीब 150 वर्ष पुराने सोन नहर क्षेत्र के लिए आरक्षित था. शेष 2.75 एमएएफ यानी 27.50 लाख एकड़ फीट में बिहार और झारखंड का हिस्सा तय होना था. इसी में से झारखंड को 20 लाख एकड़ फीट मिला है.
हिस्से का यह पानी नया कैसे होगा
सरयू राय ने सवाल उठाया कि यह पानी नया कहां से आया. यह मुख्य रूप से झारखंड की कनहर और उत्तर कोयल नदियों, उनकी सहायक नदियों तथा उन स्वतंत्र क्षेत्रों का पानी है, जो सीधे सोन नदी में गिरते हैं. इसमें कनहर का 4.32 लाख और उत्तर कोयल का 15.627 लाख एकड़ फीट पानी शामिल है.
श्री राय ने कहा कि उत्तर कोयल के 21 लाख एकड़ फीट पानी में से 15.627 लाख एकड़ फीट का उपयोग फिलहाल मोहम्मदगंज बराज से पलामू के हुसैनाबाद, हरिहरगंज और बिहार के नवीनगर की नहरों के जरिए हो रहा है. शेष 5.373 लाख एकड़ फीट पानी सीधे इंद्रपुरी बराज की ओर बह रहा है। उन्होंने कहा कि मंडल डैम बनने पर इस क्षमता का उपयोग बिहार और झारखंड की सहमति से किया जा सकता है.
राय ने कहा कि बाणसागर समझौते के बाद ही झारखंड के कदवन गांव के समीप डैम बनाने की योजना बनी थी, लेकिन वह भी अब तक नहीं बन सका। कदवन डैम का शिलान्यास बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने 1980 में किया था.
कदवन डैम से क्या मिलेगा
न्होंने कहा कि 31 अगस्त के समझौते में संभवतः कदवन डैम बनाने का प्रावधान है, लेकिन इससे झारखंड को क्या मिलेगा और इसके बदले बिहार को झारखंड से क्या मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है. डैम से बनने वाली जल विद्युत के बंटवारे को लेकर भी समझौते में स्थिति स्पष्ट नहीं है.
सरयू राय ने कहा कि झारखंड को आवंटित 20 लाख एकड़ फीट पानी के उपयोग के लिए कनहर और उत्तर कोयल बेसिन में आवश्यक योजनाएं नहीं बन सकीं। मंडल डैम नहीं बना और औरंगा की प्रस्तावित योजना भी आगे नहीं बढ़ीं.
