जी समूह के फ़ाउंडर सुभाष चंद्रा के 22 हजार करोड़ के कर्ज़ के बदले 6.25 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान को मंज़ूरी देने के आदेश को लेकर एलआईसी समेत कई कर्ज़दाताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) और एलआईसी हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने चंद्रा की ओर से पेश किए गए रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था, लेकिन अन्य कर्ज़दाताओं के बहुमत के समर्थन के चलते इसे मंज़ूरी मिल गई.
उनका कहना है कि इस प्लान को अन्य कर्ज़दाताओं के 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर के समर्थन से मंज़ूरी मिली.
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) की आपत्ति
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) ने बयान में कहा, “इंडियाबुल्स हाउसिंग फ़ाइनेंस की ओर से दायर सुभाष चंद्रा की पर्सनरल इनसॉल्वेंसी (व्यक्तिगत दिवालिया) प्रक्रिया के मामले में बैंक ने केनरा बैंक और एलआईसी हाउसिंग फ़ाइनेंस साथ मिलकर रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था.”
बैंक के मुताबिक़, उसने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से योजना को मंज़ूरी नहीं देने की अपील की थी. हालांकि, कुछ प्राइवेट सेक्टर के कर्ज़दाताओं के वोट के कारण एनसीएलटी ने योजना को मंज़ूरी दे दी.
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) ने कहा है कि वह एनसीएलटी के इस फ़ैसले को तत्काल एनसीएलएटी में चुनौती देगा.
एलआईसी ने बयान में क्या कहा
एलआईसी हाउसिंग फ़ाइनेंस ने कहा कि उसने केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) समेत अन्य सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान के ख़िलाफ़ मतदान किया था. अब वह भी एनसीएलएटी में अपील दायर करेगा.
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा, “किसान छोटा कर्ज़ न चुका पाए तो नाम और पोस्टर लगाकर बदनाम किया जाता है, वहीं 100 करोड़ रुपये से ऊपर के लोन डिफ़ॉल्टरों के नाम ‘प्राइवेसी’ के नाम पर छिपाए जा रहे हैं.”
गौरतलब है कि एनसीएलटी ने पिछले दिनों सुभाष चंद्रा के 22 हजार करोड़ के कर्ज़ के बदले 6.5 करोड़ रुपये देने की योजना को मंज़ूरी दी थी.
जी समूह के फ़ाउंडर सुभाष चंद्रा के 22 हजार करोड़ के कर्ज़ के बदले 6.25 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान को मंज़ूरी देने के आदेश को लेकर एलआईसी समेत कई कर्ज़दाताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) और एलआईसी हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने चंद्रा की ओर से पेश किए गए रीपेमेंट प्लान का विरोध किया था, लेकिन अन्य कर्ज़दाताओं के बहुमत के समर्थन के चलते इसे मंज़ूरी मिल गई.
उनका कहना है कि इस प्लान को अन्य कर्ज़दाताओं के 80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर के समर्थन से मंज़ूरी मिली.
बैंक के मुताबिक़, उसने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) से योजना को मंज़ूरी नहीं देने की अपील की थी. हालांकि, कुछ प्राइवेट सेक्टर के कर्ज़दाताओं के वोट के कारण एनसीएलटी ने योजना को मंज़ूरी दे दी.
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) ने कहा है कि वह एनसीएलटी के इस फ़ैसले को तत्काल एनसीएलएटी में चुनौती देगा.
एलआईसी ने बयान में क्या कहा
एलआईसी हाउसिंग फ़ाइनेंस ने कहा कि उसने केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (यूके) समेत अन्य सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान के ख़िलाफ़ मतदान किया था. अब वह भी एनसीएलएटी में अपील दायर करेगा.
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा, “किसान छोटा कर्ज़ न चुका पाए तो नाम और पोस्टर लगाकर बदनाम किया जाता है, वहीं 100 करोड़ रुपये से ऊपर के लोन डिफ़ॉल्टरों के नाम ‘प्राइवेसी’ के नाम पर छिपाए जा रहे हैं.”
गौरतलब है कि एनसीएलटी ने पिछले दिनों सुभाष चंद्रा के 22 हजार करोड़ के कर्ज़ के बदले 6.5 करोड़ रुपये देने की योजना को मंज़ूरी दी थी.
