तृणमूल कांग्रेस में बगावत और बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच सांसदों के एक गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर मुलाकात कर संसद में खुद के अलग बैठने की व्यवस्था मांगी है.
बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आधिकारिक पुष्टि की है कि उनका गुट त्रिपुरा आधारित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी’ में विलय कर रहा है, जिससे वे एनडीए को समर्थन दे सकें.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक काकोली घोष दस्तीदार ने कहा है, “ऑल इंडिया तृणमूल से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा, ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी में विलय कर रहे हैं. आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेंगे.”
एनसीपीआई पूर्वोत्तर की एक पार्टी है. इसका आधार त्रिपुरा और मेघालय जैसे राज्यों में है. इस पार्टी ने त्रिपुरा में 2023 का चुनाव लड़ा था. पार्टी ने चावमानु निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार उतारा था.
चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक़ यह पार्टी त्रिपुरा की रजिस्टर्ड, गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है.
कीर्ति आजाद भी पहुंचे
इस बीच, फ़िलहाल ममता बनर्जी के साथ देने का दावा करने वाले पार्टी सांसद कीर्ति आज़ाद और सागरिका घोष ने भी ओम बिरला के घर पहुंचकर उन्हें चिट्ठी दी. कीर्ति आज़ाद ने कहा कि संविधान के ख़िलाफ़ जाकर पार्टी में विभाजन नहीं हो सकता.
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर कहा है कि टीएमसी को सदन में सिर्फ़ एक पार्टी के तौर पर देखा जाए, किसी दूसरे गुट को मान्यता न दी जाए.
कीर्ति आज़ाद ने कहा, ”हमने ओम बिरला जी को चिट्ठी दे दी है. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ और 10वीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के अनुसार पार्टी में अलग गुट या विभाजन का कोई प्रावधान नहीं है. इस तरह का क़दम ग़ैर संवैधानिक है. इन लोगों ने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया.”
सागरिका घोष ने कहा, ”यह बेहद शर्मनाक है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के वे नेता, जिन्होंने ममता बनर्जी के चेहरे और पार्टी के चुनाव चिह्न के सहारे चुनाव जीता आज पार्टी की हार के बाद उसे छोड़कर जा रहे हैं. आपके सिद्धांत कहाँ हैं? आपकी विचारधारा कहाँ हैं?”
