रांचीः झारखंड में चरम पर पहुंचे मानव-हाथी संघर्ष के बीच दलमा में एलीफेंट रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया है. यह राज्य का पहला रेस्क्यू सेंटर है.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने इसका उद्घाटन किया. लगभग सात हेक्टेयर क्षेत्र में दलमा की तराई में डिमना लेक के पास कुटिमहुली में एक करोड़ की लगत से बना यह सेंटर आधुनिक सुविधाओं से लैस है.
यहां हाथियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई है. सेंटर को हाथियों के प्राकृतिक आवास के अनुरूप विकसित किया गया है. इस पहल का उद्देश्य न केवल घायल हाथियों को सुरक्षित जीवन देना है, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को भी कम करना है.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) रवि रंजन ने कहा है कि यह राज्य के पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर है. यहां हाथियों के इलाज के लिए सभी सुविधाए रहेंगी. विशेष डॉक्टर के अलावा प्रशिक्षित महावत भी यहां तैनात रहेंगे. अभी राज्य में और भी कई रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे. पश्चिमी सिंहभूम में फिलहाल 2 रेस्क्यू सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया है.
स्थापित रेस्क्यू सेंटर में हाथियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई है. उदघाटन के आरसीसीएफ स्मिता पंकज, दलमा डीएफओ सबा आलम अंसारी आदि मौजूद रहे.
हाथियों की जान खतरे में
गौरतलब है कि हाथियों के बीमार पड़ने, सारंडा के घने जंगलों में आईईडी विस्फोट से या फिर अन्य वजहों से घायल होने पर हाथियों के रेस्क्यू और इलाज के लिए अब तक बाहर की टीमों को यहां बुलाया जाता रहा है.
हाल के दिनों में कई मौके पर गुजरात की वनतारा टीम को झारखंड बुलाया गया था. समय पर इलाज नहीं होने की वजह से कई हाथियों को बचाया भी नहीं जा सका.
भारतीय वन्य जीव संस्थान और भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रोजेक्ट एलिफेंट (हाथी परियोजना) के द्वारा शोध और अध्ययन प्रासंगिक है, जिसमें ये तथ्य उभर कर सामने आए हैं कि साल 2000 से 2023 तक झारखंड में 225 हाथियों की मौत हुई है. इनमें 152 मौतें मानवीय कारणों से और 73 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई है. इसी अवधि में हाथियों के हमले में 1340 लोगों की मृत्यु हुई है. और 400 लोग घायल हुए हैं. जाहिर तौर पर यह संघर्ष सामाजिक-आर्थिक चुनौती के रूप में भी उभरा है.
