रांचीः सुप्रीम कोर्ट में ईडी अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान पेयजल घोटाले से जुड़े एक एक आरोपी से मारपीट के आरोपों की जांच सीबीआई से कराने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दी है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश्वर और जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह की अदालत में शुक्रवार को राज्य सरकार की एसएलपी पर सुनवाई हुई.
उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई के बाद सरकार की अपील याचिका खारिज कर दी.
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने 11 मार्च को मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था.
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी.
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिस व्यक्ति के आरोप पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसके खिलाफ पहले से ही दो आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह ईडी की जांच के दायरे में है.
उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी भी की थी कि ऐसा लगता है कि पुलिस ने उच्च स्तर के निर्देश पर यह कार्रवाई की है. कोर्ट ने कहा कि आरोप केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर लगाए गए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है.
ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना ही उचित होगा. अदालत ने इसे असाधारण परिस्थिति मानते हुए मामला सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था.
कोर्ट ने एयरपोर्ट थाना के प्रभारी को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था.
बिना समन के ही पहुंचा था आरोपी
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अदालत को बताया गया था कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोपी संतोष कुमार 12 जनवरी को बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंच गया था.
पूछताछ के दौरान वह अचानक उग्र हो गया और पानी का जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उसे हल्की चोट आई. इसके बाद ईडी अधिकारियों ने उसे तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा.
बाद में संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी.
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रांची पुलिस की एक टीम जांच के लिए ईडी के रांची स्थित जोनल कार्यालय पहुंच गई.
और वहां दस्तावेजों की छानबीन करने लगी. इसके खिलाफ ईडी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया था.
