रांचीः झारखंड से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे उद्योगपति परिमल नथवाणी के शनिवार को रांची पहुंचने के साथ ही राज्यसभा चुनावों को लेकर कयासों का दौर तेज हुआ है. साथ ही क्लाइमेक्स भी सिरे से बदलता नजर आ रहा है.
खबरों के मुताबिक उनके वकील ने विधानसभा जाकर नामांकन पत्र भी खरीद लिया है.
इधर भाजपा ने अब तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.
हालांकि पांच जून को भाजपा भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा विधायक दल की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मुख्य सचेतक नवीन जयसवाल ने प्रेस से कहा था कि पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी देने का निर्णय लिया है. केंद्रीय नेतृत्व को प्रत्याशी का नाम तय करना है. शुक्रवार की देर रात या शनिवार सुबह तक प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी.
जेएमएम का रुख बदला
पांच जून को ही दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने के खम ठोंकने वाले सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के तेवर भी छह जून को नरम पड़ते दिख रहे हैं. जेएमएम ने एक सीट के लिए बैजनाथ राम को उम्मीदवार घोषित किया है. एक सीट पर सत्तारूढ़ कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है.
कांग्रेस सरकार में सहयोगी दलों का समर्थन जुटाने के लिए आग्रह करती रही है. दरअसल, सत्तारूढ़ दलों के पास 56 विधायक हैं. और इंटैक्ट होकर सभी चुनाव लड़े तो झामुमो के साथ कांग्रेस की भी जीत हो सकती है.
क्या होगा नथवाणी का गणित
अगर नथवाणी राज्यसभा चुनाव में उतरते हैं, तो वे कैसे जीत का आंकड़ा जुटायेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं. वैसे राज्यसभा के चुनावों में जीत का समीकरण साधने में उन्हें एक अनुभवी और हुमर वाला चेहरा माना जाता है.
झारखंड में चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष , दोनों खेमे के नेताओं के साथ उनके संबंध अच्छे रहे हैं. राज्यसभा के सांसद रहते झारखंड में उन्होंने कई काम भी अच्छे किए हैं.
अब देखना दिलचस्प होगा कि अगर वे नामांकन करते हैं, तो उनका प्रस्तावक कौन-कौन विधायक बनते हैं.
