रांचीः झारखंड में 18 जून को दो सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव को कांग्रेस आलाकमान द्वारा नियुक्त राज्यसभा चुनाव पर्यवेक्षक एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय शर्मा ने देर शाम जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर मुलाकात की.
जेएमएम के द्वारा दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने के संकेत के बाद भूपेश बघेल का यह दौरा और हेमंत सोरेन से मुलाकात कांग्रेस खेमे के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सत्तारूढ़ दलों के गलियारे में चर्चा है कि भूपेश बघेल ने झामुमो और अन्य सहयोगी दलों से चुनाव में साथ चलने का आग्रह किया है.
हालांकि हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात को शिष्टाचार बताया है. मतलब अब तक हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को सहयोग करने को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं.
भूपेश बघेल और अजय शर्मा लगभग दो घंटे तक मुख्यमंत्री से बात करने के बाद बाहर निकले तो उनके चेहरे पर संतुष्टि और बोली में विश्वास का भाव स्पष्ट रूप से दिख रहे थे.
कहीं कोई गलतफहमी नहीं
भूपेश बघेल ने सीएम आवास के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि महागठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा. कहीं कोई गलतफहमी नहीं है.
पर्यवेक्षक बनाकर झारखंड भेजे गए अजय शर्मा ने झामुमो के कुछ नेताओं की ओर से भावनाओं के आहत होने की बात पर कहा कि दलगत राजनीति में किसी भी भावना से ऊपर नेता का निर्णय होता है और राज्य में वही होगा जो कांग्रेस और झामुमो का नेतृत्व तय करेगा. दोनों सीट महागठबंधन के उम्मीदवारों की झोली में आएगी.
प्रणव झा और बैजनाथ राम
कांग्रेस ने एक सीट पर प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन के नजदीकी हैं और कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से जुड़े हैं.
इधर झामुमो ने एक सीट के लिए पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है. झामुमो के पास 34 विधायक हैं और एक सीट पर पार्टी उम्मीदवार की जीत कंफर्म है.
कांग्रेस के द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद छह जून को सत्तारूढ़ दलो-झामुमो और कांग्रेस के बीच तनातनी की तस्वीर उभरी थी. हेमंत सोरेन ने अचानक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी. तब जेएमएम के नेताओं ने दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर दी थी.
जबकि पिछले 29 मई को झारखंड में कांग्रेस के प्रभारी के राजू तथा तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्ठी ने हेमंत सोरेन से मिलकर एक सीट पर दावेदारी की थी.
हालांकि बनते- बिगड़ते समीकरणों के बीच शनिवार को झामुमो का रुख नरम पड़ा है. झामुमो दूसरी सीट के लिए भी उम्मीदवार देगा, इसकी गुंजाइश लगभग समाप्त होती दिख रही है.
सत्तारूढ़ दलों के पास 56 विधायक हैं. एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों के वोट चाहिए होगी. अगर सत्तारूढ़ दल दोनों सीटों पर इंटैक्ट होकर लड़ते हैं, तो दोनों सीटें जीत सकते हैं. लेकिन इंटैक्ट रह पायेंगे, इस परर अब भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं.
उधर भाजपा ने भी चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है. आज-कल में भाजपा भी उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है.
