रांची : सिविल सेवा एवं अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर मंगलवार को जेपीएससी कार्यालय समेत सात ठिकानों पर सीआईडी ने छापा मारा. इसमें असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता , परीक्षा लेने वाली एजेंसी टीडीपीएल के ठिकाने भी शामिल हैं.
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान श्वेता गुप्ता के अलावा एजेंसी से जुड़े सात लोगों को हिरासत में लिया गया है. साथ ही जांच टीम ने एजेंसी के कार्यालय को सील कर दिया है.
टीडीपीएल का पूरा नाम टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड है और यह जेपीएससी से जुड़े परीक्षा कार्यों में शामिल रहती है. एजेंसी के डायरेक्टर सतपाल सिंह और रणवीर सिंह बताये जा रहे हैं.
छापेमारी के दौरान टीम ने पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, डायरी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और कागजात बरामद किए हैं. बरामद सामान को जांच टीम ने अपने कब्जे में ले लिया है.
सीआइडी की कार्रवाई के बीच इस बात की चर्चा रही कि जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता का तबादला डेढ़ महीने पहले हो गया था, तो उन्होंने कार्यालय आना- जाना क्यों नहीं छोड़ा.
दूसरी तरफ परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल पर आयोग लगातार मेहरबान रहा. जबकि परीक्षाओं में गड़बड़ियों की शिकायतें आती रहीं.
ये शिकायतें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंच रही हैं. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है.
जेपीएससी दफ्तर में भी छापा
इससे पहले जांच को लेकर सीआईडी की टीम ने जेपीएससी कार्यालय को खंगाला. सीआईडी की टीम ने जेपीएससी की असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता से भी कई तथ्यों के जवाब मांगे.
वहां जांच टीम के पहुंचते ही कार्यालय को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और किसी भी तरह की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी गई.
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई आयोग से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर की गई है.
पुलिस और सीआईडी की टीम ने आयोग के संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की.
जांच टीम ने कार्यालय में मौजूद महत्वपूर्ण फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की है. फिलहाल जांच एजेंसियों ने कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन दस्तावेजों की पड़ताल जारी है.
टीडीपीएल को काली सूची में डाला था
20 मई 2025 को परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर जेएसएससी ने टीडीपीएल कंपनी को काली सूची में डाल दिया था. लेकिन उसके बाद भी यह एजेंसी जेपीएससी में न केवल परीक्षाओं का संचालन कर रही थी, बल्कि सभी आठ तरह के संवेदनशील काम यही कर रही थी. जबकि इससे पहले परीक्षा में अलग-अलग एजेंसियों से अलग-अलग काम लिये जाते थे.
14वीं सिविल सेवा की परीक्षा सवालों के घेरे में
इन दिनों 14वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
सबसे अधिक विवाद परीक्षा के कट ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर है, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए.
बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई. हालांकि मामला केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा. अभ्यर्थियों ने इस संबंध में राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की थी.
उनका आरोप था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गईं. इसके बाद इस मामले में कई राजनीतिक दलों ने भी मोर्चा खोल दिया है.
छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की मांग है कि चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई से जांच कराई जाए।
श्रेणीवार कट ऑफ अंक जारी किए जाएं. इस बीच सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त कार्रवाई सुर्खियों में है.
