रांची. झारखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग में उपायुक्त पद पर रहते हुए पर सेवायत और वन भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री व गड़बड़ी से जुड़े मामले में जमानत की सुविधा प्रधान की है.
विनय चौबे फिलहाल जेल में हैं. विनय चौबे पर बहुचर्चित शराब घोटाला मामले (उत्पाद नीति 2022 से जुड़ा मामला) और आय से अधिक संपत्ति व अन्य मामलों में भी जांच चल रही है. हालांकि, अन्य मामलों में उन्हें पहले ही स्थानीय अदालतों या तकनीकी आधार (डिफ़ॉल्ट बेल) पर राहत मिल चुकी है. अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है.
वन भूमि घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां) ने सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है। प्राथमिकी में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, तत्कालीन अंचलाधिकारी शैलेश कुमार, ब्रोकर विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है.
