रांचीः वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मंगलवार को लोक भवन में राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर डॉ. दिनेश कुमार सिंह को पलामू स्थित नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति पद से हटाने की मांग की है.
उन्होंने आशंका जताई है कि उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय में जो अनियमितताएं हुई हैं, उनसे संबंधित साक्ष्य को कुलपति नष्ट कर सकते हैं. इसलिए उनके कुलपति पद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार वापस लेने की जगह उन्हें पद से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए। मंत्री ने इसे लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा है.
वित्त मंत्री ने राज्यपाल को विश्वविद्यालय के अक्टूबर 2025 में हुए तीसरे दीक्षांत समारोह में हुए खर्च की भी जानकारी दी है.
उनके पत्र के अनुसार, समारोह के लिए करीब 79.35 लाख रुपये का बजट तैयार किया गया था लेकिन राज्यपाल सचिवालय से बजट की मंजूरी लिए बिना ही राशि खर्च कर दी गई. पत्र में डिजिटल बोर्ड के लिए मिले 80 लाख रुपये को लेकर भी सवाल उठाया गया है.
वित्त मंत्री के अनुसार, वर्ष 2021-22 में इसके लिए राशि आवंटित कर पीएल खाते में रखी गई थी. आरोप है कि बिना जरूरी पुनर्विनियोजन के इस राशि को कुलपति की ओर से खर्च किया गया, जो वित्तीय नियमों के खिलाफ है.
वित्त मंत्री ने राज्यपाल को मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों पर रोक लगाने के पांच घंटे के अंतराल में डॉ. सिंह ने रजिस्ट्रार का ट्रांसफर कर दिया और किसी अन्य को रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया है.
गौरतलब है कि वित्त विभाग के अंकेक्षण में डॉ. दिनेश कुमार सिंह द्वारा विश्वविद्यालय में कई अनियमितताएं की जाने की पुष्टि हुई है.
साथ ही राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना करते हुए अपने पसंद के अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दे दी गई.
ऐसा उन्होंने किसी खास संवेदक को लाभ पहुंचाने के लिए किया. जांच रिपोर्ट के बाद राज्यपाल ने उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है.
राज्यपाल ने कराया था अंकेक्षण
वित्त मंत्री ने पिछले वर्ष राज्यपाल से मिलकर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में अनियमितता की जानकारी दी थी, जिसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर विश्वविद्यालय का विशेष अंकेक्षण कराया गया. वित्त विभाग द्वारा कराए गए अंकेक्षण में विश्वविद्यालय में भारी अनियमितता की पुष्टि हुई.
अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार परीक्षा कार्यों के संचालन के मद में लगभग 2.50 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान किया गया.
वर्तमान कुलपति पर नियम विरुद्ध नियुक्ति तथा बार-बार अवधि विस्तार का विस्तृत उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है.
