झारखंड जनाधिकार महासभा ने आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने पर इसकी निंदा की है.
महासभा ने कहा कि स्याही फेंकने वाले व्यक्ति ने जय श्री राम का नारा लगाया. जो कि झारखंड के छात्र युवाओं की एकता को तोड़ने व जेपीएससी आंदोलन को भाजपा आरएसएस द्वारा गलत दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है.
महासभा ने प्रेस बयान में कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र-युवाओं के जेपीएससी आंदोलन में कई महासभा के लोग पहले से ही हैं. 14वीं जेपीएससी परीक्षा पर उजागर हुए तथ्यों से स्पष्ट है कि व्यापक गड़बड़ी और घोटाला हुआ है. ऐसी स्थिति केवल जेपीएससी ही नहीं, बल्कि हर सरकारी नियुक्ति में भी दिख रही है.
बीजेपी आंदोलन को गलत दिशा दे रही
उन्होंने कहा कि अपने अनिश्चित भविष्य के प्रति चिंतित झारखंडी छात्र युवा आंदोलनरत हैं. अलग-अलग समूहों में भी आंदोलनरत हैं. और सभी आंदोलन महत्त्वपूर्ण है. लेकिन यह भी दिख रहा है कि झारखंडी छात्र-युवाओं के आंदोलन को भाजपा-आरएसएस व इससे जुड़े मीडिया द्वारा अपनी राजनीति अनुसार गलत दिशा दिया जा रहा है.
महासभा ने कहा कि आंदोलन से जुड़े कुछ जंतर मंतर के आंदोलन गलत बता रहे हैं और उनके आंदोलन को सही. जंतर-मंतर आंदोलन व इससे जुड़े लोगों पर भाजपा के लोग तब भी टिप्पणी कर रहे थे. अब भी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसमें स्पष्ट रूप से कहीं न कहीं भाजपाई संकीर्णता काम कर रही है. यह छात्र युवा की एकता को दलीय संकीर्णता में तोड़ने का काम है.
किया जा रहा है बदनाम
इसके अलवा राज्य में सांप्रदायिक भाषणों से समाज को बांटने वाले नेता व उनके चेले आंदोलन स्थल पर चारों तरफ दिख रहे हैं. यह महज संयोग नहीं है कि जो मीडिया जंतर-मंतर आंदोलन को शुरू से बदनाम करने में लगी रही और जमीनी रिपोर्टिंग ईमानदारी से नहीं की, वही यहां पूरे जोश में भाजपा के नैरेटिव को चलाने में दिख रही है.
महासभा ने कहा कि छात्र आंदोलन एक-दूसरे के विरुद्ध कभी नहीं हो सकते. चाहे जंतर-मंतर का राष्ट्रीय आंदोलन या झारखंड का JPSC आंदोलन. लेकिन आंदोलन स्थल पर भाजपा से जुड़े नेताओं और मीडिया के द्वारा विभाजन पैदा की जा रही है. यह भाजपा की संकीर्ण राजनीतिक सोच है, जो छात्र-युवा आंदोलनों की एकजुटता के लिए हानिकारक है. भाजपा व मोदी सरकार द्वारा दिल्ली आंदोलन के प्रति रवैया यह स्पष्ट करता है कि ये छात्र-युवाओं के हित में न सोचते हैं और न काम करते हैं.
