रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ रांची में छात्रों के जारी आंदोलन के बीच रविवार को सरकार के मंत्रियों ने छात्रों के साथ तीसरे दौर की वार्ता की. सरकार ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच कराई जाएगी. दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी होगी. लेकिन छात्र नहीं माने. दूसरी तरफ सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने दावा किया है कि छात्रों की 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन गई है.
इस बीच पूर्व निर्धारित 10 अगस्त के विधानसभा घेराव कार्यक्रम की तैयारियों में वे जुटे हैं. भारतीय जनता युवा मोर्चा ने भी घेराव को समर्थन दिया है.
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद, झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, “तीन दिनों की बातचीत और व्यापक विचार-विमर्श के बाद, और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशों पर अमल करते हुए, सरकार ने 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग भर्तियों से जुड़ी अनियमितताओं को दो तरीक़े से हल करने का फ़ैसला किया है.”
उन्होंने कहा कि आपराधिक पहलुओं की जांच साआइ़डी करेगी. जबकि गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन के सबूतों को देखते हुए ईडी से जांच कराने का अनुरोध किया जाएगा.
फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन
मंत्री ने बताया कि इसके बाद एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा और आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाएगी. साथ हगी ज़रूरी सुधारों के बारे में सरकार ने कहा कि इस प्रक्रिया में मार्गदर्शन के लिए आइआइटी-आईएसएमऔर XLRI के विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी
JSSC CGL रद्द करने पर अड़े हैं छात्र
वार्ता के दौरान इन चर्चाओं के बाद, छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग की.
इस पर सरकार ने साफ़ तौर पर कहा कि चूँकि परीक्षा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी और अभी उनकी निगरानी में है, इसलिए उसे रद्द करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है.
सरकार ने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाकर जाँच की देखरेख करने का प्रस्ताव दिया; हालाँकि, छात्रों ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया.
जाहिर तौर पर JSSC CGL परीक्षा को लेकर वार्ता में जिच कायम रहा.
98 प्रतिशत मांगों पर सहमति
मंत्री ने कहा, हमारा मानना है कि सरकार उठाए गए 98 प्रतिशत मुद्दों पर सहमत हो गई थी। बाकी दो प्रतिशत—खासकर CGL परीक्षा रद्द करने की मांग पूरी नहीं की जा सकी, क्योंकि सरकार कोर्ट के आदेश पर आयोजित परीक्षा को एकतरफा तौर पर रद्द नहीं कर सकती, जिसके नतीजे घोषित हो चुके हैं और सफल उम्मीदवार पहले से ही नौकरी कर रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों में भरोसा जगाने के लिए, सरकार CID के काम की निगरानी के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाने को तैयार थी, ताकि अगर छात्रों को लगे कि CID उनकी बात नहीं सुन रही है, तो वे अपनी चिंताएँ ज़ाहिर कर सकें.
राज्य सरकार के चार मंत्रियों की कमेटी के साथ वार्ता के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने कहा है टीडीपीएल एजेंसी से कराई गई परीक्षाओं की सिर्फ जांच काफी नहीं है. इन परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए.
छात्रों ने इन परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआइ जांच पर जोर दिया. इसके साथ ही कहा कि तीनों मांगों पर हू-ब-हू निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा. साथ ही कल का विधानसभा घेराव कार्यक्रम भी होगा।
सरकार की कमेटी में मंत्री सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिहं, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हैं.
