रांचीः झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत इस साल सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है.
झारखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से जुलाई महीने तक 22 नक्सलियों को मार गिराया है. जबकि 113 नक्सलियों-उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है. जबकि इसी अवधि में कुल 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.
सरेंडर करने वालों ने 111 हथियार (81 पुलिस से लूटे गए प्रतिबंधित), 9,904 कारतूस पुलिस को सौंपे हैं. जबकि 11 किलोग्राम विस्फोटक और छह लाख रुपये लेवी की राशि जब्त की गई है.
इनके अलावा, झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के दबाव के कारण पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ में आठ, पश्चिम बंगाल में दो, तेलंगाना में दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है.
जिन 113 नक्सलियों- उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें 49 भाकपा माओवादी, 30 पीएलएफआई, 23 टीपीसी, 10 जेजेएमपी और एक एसजेएमएम का नक्सली शामिल हैं.
झारखंड पुलिस का दावा है कि छत्तीसगढ़-गढ़वा-लातेहार सीमा पर स्थित बूढ़ा पहाड़, सारंडा, टोंटो, गोईलकेरा, पोड़ाहाट, पारसनाथ, लुगु व झुमरा पहाड़, सरयु-गारू और कुचाई के घने जंगल के अलावा चतरा-हजारीबाग का कौलेश्वरी पहाड़, गुमला का चैनपुर, विशुनपुर, खूंटी का दक्षिण-पश्चिम वन क्षेत्र, पूरी तरह से नक्सलमुक्त हो चुके हैं.
इनामी नक्सलियों का खात्मा और गिरफ्तारी
गिरफ्तार नक्सलियों में एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा, 25 लाख का इनामी अजय महतो और 15-15 लाख के इनामी रबिंद्र गंझू, मेहनत और मदन महतो शामिल हैं.
अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जाने वाले 22 माओवादियों में एक करोड़ का इनामी अनल उर्फ पतिराम मांझी, 25 लाख का इनामी अनमोल उर्फ सुशांत, और 15-15 लाख के इनामी अमित मुंडा व सहदेव महतो शामिल हैं.
