रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती परीक्षा गड़बड़ी मामले में सरकार द्वारा अदालत में लगातार बदलते हलफनामे पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी, तो पहले के हलफ़नामों का सच क्या था. जवाबदेही सिर्फ़ नीचे वालों की, संरक्षण ऊपर वालों को क्यों.
मरांडी ने एक्स पर कहा है, “राज्य सरकार की ओर से कल (18 सितंबर) हाई कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताया गया है. जब सरकार ख़ुद यह स्वीकार कर रही है, तो सवाल उठता है कि सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक की इस चौकड़ी की भूमिका और जवाबदेही की जाँच क्यों न हो. पहले न्यायालय के सामने पूरे तथ्य क्यों नहीं रखे गए. क्या अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई थी.”
पहले जांच को गलत दिशा दी
उन्होंने कहा कि जाँच को पहले ग़लत दिशा में ले जाने और “गड़बड़ी नहीं हुई” का दावा करने के आरोपों का जवाब कौन देगा? इस आशय का शपथपत्र किसके कहने पर और किसे बचाने के लिए दाख़िल किया गया? पहले की जाँच में अनुराग गुप्ता की भूमिका और बाद में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जानकारी को लेकर मनोज कौशिक की जवाबदेही कैसे टाली जा सकती है. एक ही परीक्षा को लेकर पहले की सफ़ाई और अब की स्वीकारोक्ति के बीच का अंतर महज़ भूल है या किसी को बचाने की कोशिश.
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री की जवाबदेही का है. क्या उनकी जानकारी और सहमति के बिना इतना बड़ा खेल संभव था. यदि सरकार को जानकारी नहीं थी, तो शासन और निगरानी कहाँ थी. यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?.माननीय न्यायालय को इस पूरे पहलू का भी संज्ञान लेना चाहिए.
सीबीआई जांच जरूरी
मरांडी ने सवालिया लहजे में पूछा है कि क्या इतना व्यापक बहाली घोटाला अब तक पकड़े जा रहे निचले स्तर के लोगों के अकेले के बस की बात थी. यदि पूरी बहाली व्यवस्था वही संचालित कर रहे थे, तो अध्यक्ष और सचिव किस काम के लिए बैठाए गए थे. अधिकार और सुविधाएँ ऊपर वाले भोगें, लेकिन जवाबदेही के समय केवल नीचे वाले पकड़े जाएँ, यह कैसा न्याय है.
उन्होंने कहा कि जब पूरी परीक्षा प्रक्रिया ही दूषित थी, तो सीआईडी की पहले की जाँच में यह सच सामने क्यों नहीं आया. जिस जाँच की निष्पक्षता स्वयं सवालों के घेरे में हो, उसी के भरोसे लाखों छात्रों का भविष्य कैसे छोड़ा जा सकता है.
मरांडी ने फिर दोहराया कि झारखंड के लाखों छात्रों को न्याय दिलाने के लिए इस पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच कराई जानी चाहिए. JSSC और JPSC जैसी भर्ती संस्थाओं की साख भाषणों, सफ़ाई और बदलते हलफ़नामों से वापस नहीं आएगी. वह तभी बहाल होगी, जब पूरी सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर उनके पद तथा पहुँच की परवाह किए बिना कार्रवाई होगी.
