मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों का संसद से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च शुरू है.
मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत कई सांसदों को पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया. इसके बाद सांसदों ने वहीं धरना दिया. आगे जाने से रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया.
मार्च को देखते हुए संसद और निर्वाचन आयोग मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की गई थी.
विपक्षी सांसदों के हाथों में आरएसएस की वर्दी में ज्ञानेश कुमार को दर्शाने वाले कटआउट थे.
उन्होंने “बीजेपी ही मुख्य चुनाव आयुक्त है”, “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है” जैसे नारे लगाए.
राहुल गांधी के हाथों में भी तख्ती है, जिसमे लिखा है, “ज्ञानेश, ज्ञानेश इट्स डन ब्रो. अब इस्तीफ़ा देने का समय है.”
यह विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के एक दिन बाद हुआ, जिसमें अदालत ने कहा था कि उसने फ़ॉर्म 6 के किसी भी संशोधन को मंज़ूरी नहीं दी है.
विपक्ष मतदाता सूचियों के एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगा रहा है.
इस बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुँचने के लिए आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हो गए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राहुल और प्रियंका पुलिस के रोके जाने के बावजूद वहाँ दाखिल हो गए.
राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्तों से विपक्षी सांसदों की मुलाक़ात नहीं होने पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, “300 से ज़्यादा विपक्षी सांसद आज संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर चुनाव आयुक्तों से मिलने पहुंचे. हम करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं. चुनाव आयुक्त हमसे मुलाक़ात क्यों नहीं कर रहे हैं? पुलिस हमें रोक क्यों रही है और धमका क्यों रही है?”
विरोध मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों के दौरान बेईमानी से काम किया.
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने “पूरी तरह बेख़ौफ़ तरीक़े से खेल खेला.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर कहा है, “जो देश की ख़ातिर हैं लड़ते वो गिरफ़्तारी से नहीं हैं डरते. बीजेपी ही सीईसी है. देश का एकमत, सीईसी दे त्यागपत्र.”
