सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र की उस याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें झारखंड सरकार और अन्य के खिलाफ़ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है.
यह मामला सीनियर आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को उनके रिटायरमेंट से एक दिन पहले राज्य का डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) नियुक्त करने से जुड़ा है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मिश्रा की नियुक्ति से जुड़ी दूसरी याचिकाओं के साथ केंद्र की याचिका को लिस्ट करने पर सहमत हो गई.
लॉ ट्रेंड के मुताबिक केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि इस नियुक्ति को चुनौती देने वाले लंबित मामलों के साथ ही इस अवमानना याचिका पर भी विचार किया जाए. चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिका गुरुवार को भी सुनवाई के लिए लिस्ट की जाएगी.
सीनियर वकील राजू रामचंद्रन, जो डीजीपी नियुक्ति से जुड़े मामलों में एमिकस क्यूरी के तौर पर कोर्ट की मदद कर रहे हैं, ने पहले बेंच को बताया था कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट की उस ज़रूरत का उल्लंघन करती है जिसके तहत डीजीपी का चार्ज लेते समय किसी ऑफिसर की कम से कम छह महीने की बची हुई सर्विस होनी चाहिए.
रामचंद्रन उन याचिकाओं में कोर्ट की मदद कर रहे हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कई राज्य पुलिस महानिदेशकों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करने में नाकाम रहे हैं.
प्रकाश सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार,डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए किसी अधिकारी की कम से कम छह महीने की बची हुई सर्विस होनी चाहिए.
