रांचीः झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया है.
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति की सिफारिश पर योगेंद्र साव को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया गया.
मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया है कि अनुशासन समिति की सिफारिश पर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने यह कार्रवाई की है.
पार्टी ने उन पर अनुशासन का उल्लंघन करने और गठबंधन सरकार तथा मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के मामले में यह कार्रवाई की है.
पिछले महीने शोकॉज
गौरतलब है कि पिछले महीने झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को शोकॉज जारी करते हुए तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा था.
पार्टी की अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव ने यह कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इसमें कहा था कि हालिया मीडिया में आपके आपत्तिजनक बयान से पार्टी की गरिमा को ठेस पहुंची है. यह नेतृत्व के निर्देश की अवहेलना भी है. इसलिए तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने तथा स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था.
नोटिस में यह भी कहा गया था कि पूर्व में भी पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के कारण आपको पार्टी से निष्कासित किया गया था. बाद में पार्टी नेतृत्व ने उनके लंबे संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखते हुए निष्कासन का निर्णय निरस्त किया था. लेकिन हाल में मीडिया के माध्यम से उनके द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है.
शोकॉज के बाद भी चुप नहीं
हालांकि,अनुशानहीनता पर शोकॉज जारी किए जाने के बाद भी पूर्व मंत्री योगेंद्र साव चुप नहीं रहे.
हजारीबाग में मीडिया से बात करते हुए पार्टी द्वारा जारी शोकॉज पर योगेन्द्र साव ने दो टूक कहा, “मैं कांग्रेस का सिपाही हूं लेकिन गांधी जी का तीन बंदर बनना मेरी फितरत में नहीं है. मैं हमेशा से गलत का विरोध करता रहा हूं, और आगे भी करता रहूंगा. पार्टी की नीति सिद्धांतों से जुड़कर आम अवाम का सेवा करने का काम किया हूं.”
इसके साथ ही उन्होंने अफसरों के साथ सरकार पर कथित करप्शन और उगाही में संलिप्त रहने के आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही झामुमो के नेताओं पर भी निशाना साधा.
हजारीबाग में क्या हुआ था 18 सितंबर को
गौरतलब है कि 18 सितंबर को खासमहल जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान योगेंद्र साव ने प्रशासनिक टीम से कथित तौर पर अभद्रता पेश करते नजर आए थे.
सदर अंचल के सीओ सह खासमहल पदाधिकारी आशुतोष खासमहल होल्डिंग नंबर 302, रकबा 50 डिसमील जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे. इस दौरान योगेंद्र साव अधिकारी से उलझ गए.
अतिक्रमण हटाओ की कार्रवाई के विरोध में वे जेसीबी के आगे बैठ गए और विरोध करने लगे. स्थिति को देखते हुए प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा.
प्रशासन का कहना है कि इस जमीन से चार बार अतिक्रमण हटाया गया है. इसके बाद भी गोशाला और पीसीसी सड़क बनाने की शिकायत मिली थी. जबकि योगेंद्र साव का जोर था कि इस भूखंड का एटॉर्नी पावर उनके पास है. अतिक्रमण हटाने का प्रशासन के पास कोई आदेश नहीं था.
सीएम के खिलाफ आपत्तिजनक बयान
इस दौरान योगेद्र साव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मीडिया में कथित आपत्तिजनक बयान दिए थे. ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ.
उसी दिन योगेंद्र साव की पुत्री बड़कागांव की पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि इस किस्म का बयान अपेक्षित नहीं था.
जबकि योगेंद्र साव के इस बयान पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर साव का एक कथित वीडियो क्लीप को साझा करते हुए राहुल गांधी को घेरा था.
इधर प्रदेश कांग्रेस के अंदर भी इन बयानों और योगेंद्र साव के आचरण को लेकर चर्चा होने लगी. अब अनुशासन कमेटी ने शोकॉज किया.
मार्च महीने में पार्टी ने निकाला था
गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल के मार्च महीने में सरकार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर योगेंद्र साव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.
हजारीबाग के चट्टी बरियातू कोल माइंस क्षेत्र में स्थित योगेंद्र साव के मकान को बुलडोजर से जमींदोज किए जाने के बाद पूर्व मंत्री की सोशल मीडिया पर टिप्पणी को लेकर प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने उन्हें तीन साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था. इस कार्रवाई से साव परिवार नाराज था.
तब 22 मार्च को योगेंद्र साव की पुत्री अंबा प्रसाद ने रांची में एक प्रेस कांफ्रेंस में इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि आत्मसम्मान विसर्जित कर राजनीति नहीं करनी. इसके साथ ही गठबंधन की सरकार पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे.
इसके साथ ही उन्होंने कहा था, “कोयला खनन को लेकर जमीन अधिग्रहण तथा मुआवजे के सवाल और एनटीपीसी तथा पुलिस, प्रशासन के रवैये के खिलाफ पर उनका संघर्ष जारी रहेगा और यागेंद्र साव के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में वे लोग आलाकमान तक पहुंचकर गुहार लगाएंगे.”
लेकिन तीन महीने बाद योगेंद्र साव के खिलाफ कार्रवाई खत्म करते हुए उन्हें पार्टी में वापस कर लिया गया.
