राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति की है. इनमें ब्रज मोहन राम का भी नाम शामिल है. ब्रजमोहन राम के नाम को लेकर झारखंड की राजनीति में खासी चर्चा है. साथ ही इसे चौंकाने वाला माना जा रहा है.
अनसूचित जाति से आने वाले ब्रजमोहन राम 90 के दशक में पलामू रिजर्व सीट से तीन बार सांसद रहे हैं.
अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के जमाने में वे झारखंड से बीजेपी के लोकप्रिय नेता रहे. सरल, सहज और निष्ठावान नेता के तौर पर पार्टी में उनकी छवि रही है.
भाजपा के प्रति लंबे समय से समर्पित रहे ब्रजमोहन राम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति को उनके राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक योगदान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. साथ ही इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं. वह इसलिए कि अटल-आडवाणी के जमाने के एक नेता, जो अभी पार्टी की पिछली कतार में चल रहे थे, उनके नाम पर केंद्र ने महत्वपूर्ण पद के सहमति दी है.
लंबे समय से भाजपा में सक्रिय रहे ब्रजमोहन राम की पहचान अनुसूचित जाति के प्रमुख नेताओं में होती रही है.
झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों में से पलामू की सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है. पलामू से अभी बीजेपी के वीडी राम सांसद हैं. झारखंड राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे वीडी राम पलामू से लगातार तीन बार जीते हैं.
हाल ही में झारखंड में दो सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा से बैजनाथ राम जीते हैं. बैजनाथ राम पूर्व मंत्री होने के साथ बीजेपी से ही निकले नेता हैं.
अब पलामू के ब्रज मोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाये जाने पर राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि भाजपा की सीधी नजर समीकरणों को साधने के साथ पुराने नेताओं को अगली कतार में लाने पर है.
झारखंड विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए नौ रिजर्व सीट है. 2024 के चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों को इन नौ में से चार सीटों पर जीत मिली है.
1991 में विधायक बने
ब्रजमोहन राम वर्ष 1991 में पहली बार लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये. वर्ष 1991 से 1995 तक उन्होंने विधायक के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. इसके बाद उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा.
वर्ष 1996, 1998 और 1999 में ब्रजमोहन राम पलामू लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए. इस दौरान उन्होंने संसद में पलामू की आवाज उठाने के साथ विभिन्न संसदीय समितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. विधायक से सांसद तक का उनका सफर क्षेत्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और लंबे राजनीतिक अनुभव को दर्शाता है.
भाजपा संगठन में कई अहम पदों पर रहे
संसदीय जिम्मेदारियों के अलावा ब्रजमोहन राम ने भाजपा संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभायी. वर्ष 1996 से 1998 तक वे रांची वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहे. इसके अलावा उन्होंने झारखंड भाजपा के उपाध्यक्ष और अनुसूचित जाति मोर्चा के राज्य प्रभारी सहित कई संगठनात्मक पदों पर काम किया. संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण पार्टी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
पलामू प्रमंडल से राज्यपाल बनने वाले दूसरे नेता
ब्रजमोहन राम का जन्म एक जनवरी 1958 को हुआ था. पलामू से तीन बार सांसद चुने जाने के बाद ओड़िशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति उनके राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव है. पलामू प्रमंडल से राज्यपाल बनने वाले वे दूसरे नेता हैं. उनसे पहले पलामू के भीष्म नारायण सिंह ने भी कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं. भीष्म नारायण सिंह का निधन हो चुका है.
ओडिशा के अलावा सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर अब केरलम् के नए राज्यपाल होंगे. केरलम् के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अब तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. जबकि डॉ. सुधा यादव कर्नाटक की राज्यपाल होंगी. डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है जबकि दुष्यंत गौतम सिक्किम के राज्यपाल होंगे। सभी नियुक्तियां कार्यभार संभालने की तिथियों से प्रभावी होंगी.
