रांचीः बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित घोटाले के मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन हो गया है.
इस मामले में बुधवार को पीएमएलए की विशेष अदालत में सुनवाई हुई. अदालत ने हेमंत सोरेन को आरोप पढ़कर सुनाया, जिससे उन्होंने इनकार किया.
कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए.
उनके खिलाफ यह कार्रवाई पीएमएलए (मनी-लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002) के तहत की गई.
इस मामले में पहले ही 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित हैं. अब इस मामले में ट्रायल की कार्यवाही शुरू होगी.
इस बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए वकील संजीव कुमार ने कहा, ‘स्पेशल पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) कोर्ट ने झारखंड के मुख्यमंत्री पर आरोप तय किए और अब मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया है.’ अब इस मामले में ट्रायल शुरू होगा और गवाहों से पूछताछ की जाएगी.
हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं
उधर बुधवार को ही हुए एक अन्य घटनाक्रम में झारखंड हाईकोर्ट ने इस जमीन घोटाले से जुड़े मामले में, रांची की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट द्वारा उन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
सोरेन ने रांची की पीएमएलए कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी. लेकिन फिलहाल राहत नहीं मिली.
इस दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल हाई कोर्ट में दायर याचिका के आधार पर कार्यवाही रोकने की मांग पर विचार नहीं किया जाएगा.
सुनवाई के बाद अदालत ने ईडी से जवाब मांगा है. मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.
गौरतलब है कि इससे पहले भी हेमंत सोरेन की ओर से हाईकोर्ट में दायर हस्तक्षेप याचिका खारिज हो चुकी है.
उस याचिका में उनके डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज करने के विशेष अदालत के आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था.साथ ही ट्रायल कोर्ट में मामले की आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगाने की मांग की गई थी.
हाईकोर्ट ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी थी.
ईडी ने केस दर्ज किया था
वर्तन निदेशालय (ईडी) ने रांची के बड़गाईं इलाके में ज़मीन के कथित अवैध अधिग्रहण और ट्रांसफर के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.
यह मामला इन आरोपों पर आधारित है कि सोरेन ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पद का गलत इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से ज़मीन हासिल की थी.
सोरेन को ईडी ने जनवरी 2024 में ज़मीन से जुड़े इस मामले में गिरफ़्तार किया था और जून 2024 में झारखंड हाई कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दे दी थी.
