जमशेदपुरः महीनों से कर्तव्य भत्ता (मानदेय) नहीं मिलने और रीढ़ में असहनीय पीड़ा से हताश-निराश एक महिला होमगार्ड का ड्यूटी के दौरान फूट-फूट कर रोने की घटना ने सरकारी तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है.
बोड़ाम क्षेत्र की रहने वाली महिला होमगार्ड फूलकुमारी एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में तैनात हैं. अस्पताल में ही सुबह में वह फूट-फूट कर रो पड़ी.
अपनी बेबसी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “पाँच महीने से मानदेय नहीं… अब जीना मुश्किल है. हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे”.
गौरतलब है कि एमजीएम में तैनात फूलकुमारी समेत 90 होमगार्ड के जवानों को पिछले करीब पाँच महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है.
जब आस टूटती नजर आई
शनिवार सुबह करीब 9 बजे उन्हें पता चला कि अगले सप्ताह भी बकाया मानदेय मिलने की कोई संभावना नहीं है. यह सुनते ही वह हिम्मत खो बैठी. आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारी से जूझ रही महिला बिलखते हुए बार-बार कहने लगीं, “हमको पैसा दिला दीजिए, नहीं तो हम मर जाएंगे.”
उनकी यह बात सुनकर अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मौजूद कर्मचारियों व अन्य होमगार्ड जवानों ने तुरंत उन्हें संभाला. सब्र रखने की सलाह दी. इस दौरान कई साथी जवान भी भावुक हो गए.

छह महीने से रीढ़ में दर्द
बताया जा रहा है कि फूलकुमारी पिछले करीब छह महीनों से रीढ़ के असहनीय दर्द से भी पीड़ित हैं. इन मुश्किलों के बीच वे ड्यूटी पर आता है. सिर्फ इसलिए कि भत्ता कट सकता है.
उन्होंने एमजीएम अस्पताल समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में अपनी बीमारी का इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिलने पर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक चिकित्सक से इलाज शुरू कराया. डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है. पति भी आर्थिक मदद करने की स्थिति में नहीं हैं.
जब एक होमगार्ड ने फिनाइल पी ली
कुछ दिन पहले भी एमजीएम अस्पताल में कार्यरत एक अन्य महिला होमगार्ड ने मानसिक तनाव के चलते फिनायल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था

एमजीएम अस्पताल में तैनात 90 होमगार्ड जवानों को पिछले 5 माह से कर्तव्य भत्ता नहीं मिला है. इस कारण होमगार्ड जवानों को कर्ज लेना पड़ रहा है. जवानों ने बताया कि उन लोगों को अंतिम फरवरी में मिला था। इसके बाद अब जुलाई का भी आधा महीना पार हो चुका है. वेतन नहीं मिलने से जवानों को परिवार चलाने में परेशानी हो रही है। इस बाबत जवानों ने अधिकारियों के समक्ष गुहार भी लगाई है.
आनन-फानन में कमांडेंट ने पत्र निकला
इस बीच जिला समादेष्टा, झारखंड होमगार्ड, पूर्वी सिंहभूम ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा है कि एमजीएम कॉलेज और अस्पताल में तैनात होमगार्ड्स को कर्तव्य भत्ता नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए वे दूसरी वैसी संस्थानों में , जहां कर्तव्य भत्ता का भुगतान किया जा रहा है, वहां प्रतिनियुक्ति के लिए कार्यालय से कमान प्राप्त कर सकते हैं.
