रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को हटाने को लोकतंत्र पर हमला बताया है.
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है..हाल की कई घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास हो रहा है.
लोकतंत्र के लिए खतरा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में जवानों के साथ अनशन स्थल पर पहुंचकर वांगचुक को जबरन वहां से हटाया.
उन्होंने कहा कि जिस तरीके से उन्हें सफेद चादर में ढंककर अस्पताल ले जाया गया उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था की तस्वीर को झकझोर दिया. भट्टाचार्य ने इसे केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश बताया.
संविधान की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा
सुप्रियो ने कहा कि यह मामला किसी एक आंदोलन या व्यक्ति तक सीमित नहीं है।.असली चुनौती देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने खड़ी की जा रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है और आगामी संसद के मानसून सत्र में प्रस्तावित अनेक संशोधनों को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए.
भट्टाचार्य ने कहा कि संविधान के 75वें वर्ष में लोकतांत्रिक अधिकारों और न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी पहल का विरोध किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार भी इसकी बुनियाद है. यदि इन अधिकारों पर अंकुश लगाने की कोशिश होगी तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।
गाड़ियों को भी होने लगी है डायबिटीज
सुप्रियो भट्टाचार्य ने देश की सड़कों की स्थिति और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के दावों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने हाल के दिनों में सड़कों के धंसने और बुनियादी ढांचे से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावों की वास्तविकता अब सामने आने लगी है. व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने कहा कि अब तो ऐसा लगने लगा है कि ‘गाड़ियों को भी डायबिटीज’ होने लगी है और आने वाले समय में ऐसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं.
उन्होंने कहा कि कभी नितिन गडकरी को विकास और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाला नेता माना जाता था लेकिन अब लगातार सामने आ रही घटनाओं ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
