रांचीः झारखंड लोकसेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा के अलावा अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआइडी की टीम ने आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते के आवास पर छापेमारी कर रही है.
इससे पहले सीआइडी ने बुधवार को इसी मामले में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.
जांच एजेंसी की तेज होती कार्रवाई से संकेत मिले हैं कि इस मामले में आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी की टीम ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की है.
इस मामले में सीआइडी ने बुधवार को कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है.
श्वेता गुप्ता के अलावा जिनकी गिरफ्तारी हुई है उनमें एक आपूर्ति पदाधिकारी अभय तिवारी और आयोग की परीक्षा लेने वाली एजेंसी टीडीपीएल के तीन लोग शामिल हैं.
अभय तिवारी भी पहले इसी एजेंसी में मैनेजर थे.. बाद में वे जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षाओं में चयनित हुए. अभी वे प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के तौर पर काम कर रहे थे.
इन गिरफ्तारी के बाद गुरुवार की सीआइडी की टीम दिन में अचानक ख्यांग्ते के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी की. बताया जा रहा है कि सीआइडी की टीम कई आवास में रखे कई दस्तावेजों की छानबीन कर रही है.
हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
मंगलवार को छापे के बाद इस्तीफा
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और परीक्षाओं का संचालन करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के ठिकानों पर मंगलवार को अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की छापेमारी के बाद आयोग के चेयरमैन एल ख्यांग्ते ने इस्तीफा दिया था.
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा बुधवार को स्वीकार कर लिया.
प्रशासनिक हलके में माना जा रहा है कि जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार के सख्त रुख को देखते हुए चेयरमैन ने अपना इस्तीफा दिया है.
मुख्य सचिव भी रहे हैं
झारखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे एल ख्यांग्ते को 27 फरवरी 2025 को झारखंड लोक सेवा आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया था.
उनका कार्यकाल 25 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित था, लेकिन परीक्षा विवाद और प्रशासनिक दबाव के बीच उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ना पड़ा.
वह झारखंड के मुख्य सचिव और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) रह चुके हैं.
