रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएसी-सीजीएल) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और सिडिंकेट के कारनामों की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान विभाग की एसआईटी को कई नई और चौंकाने वाली जानकारी मिल रही है. जेपीएससी और जेएसएसी की परीक्षाओं में गड़बड़ी के मास्टरमाइंड अभय तिवारी को जांच एजेंसी ने पहले ही गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी को पता चला है कि अभय तिवारी के पिता ने भी जेपीएससी की परीक्षा दी थी. लिहाजा वे भी रडार पर हैं.
जांच एजेंसी ने अभय तिवारी के भाई और पत्नी को भी गलत तरीके से परीक्षा पास करने के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है.
सीआईडी की जांच में यह जानकारी सामने आई है कि अभय तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी ने भी टीडीपीएल द्वारा आयोजित वर्ष 2024 की परीक्षा में शामिल हुए थे.
सुखदेव तिवारी ने एफआईओ पीटी 2024 और एसीएफ पीटी 2024 दोनों परीक्षाएं दी थीं.
एफआऱओ की भर्ती परीक्षा में जहां सुखदेव तिवारी का रोल नंबर-24400147 था वहीं एसीएफ परीक्षा में उसका रोल नंबर 24300086 था। दोनों परीक्षाओं का आयोजन जेपीएससी के मातहत हुआ था और परीक्षाओं का संचालन टीडीपीएल ने किया था.
सीआईडी का बड़ा खुलासा
कोर्ट के समक्ष पेश दस्तावेजों और जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार, इस पूरे मामले में परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल और उसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी ही पैसे के बदले नौकरी देने का मास्टरमाइंड है. जांच में अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने और अंतिम चयन कराने का भरोसा देकर पैसे लेने, परीक्षा प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर कराने और अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर नौकरी दिलवाने की बात सामने आई है.
सीआईडी को पता चला है कि एफआरओ और एसीएफ की परीक्षा की 500 से अधिक ओएमआर शीट में छेड़छाड़ की गई है. मूल्यांकन प्रणाली और सर्वर में डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ किए जाने की बात भी सामने आई है.
अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को सिस्टम मैनिपुलेट करने का भरोसा दिलाने का आरोप
सीआईडी की जांच में यह भी पता चला है कि अभय तिवारी की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप यह है कि वह अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा देता था. जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, वह अपने और अपने करीबियों के कथित चयन को उदाहरण के तौर पर बताकर अभ्यर्थियों को विश्वास दिलाता था कि परीक्षा की व्यवस्था को प्रभावित किया जा सकता है.
आरोप है कि अभय तिवारी पिटी परीक्षा पास कराने के नाम पर करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन कराने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की रकम की मांग करता था. यानी कथित तौर पर अभ्यर्थियों को पहले प्रारंभिक परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था और इसके बाद अंतिम चयन के लिए अलग-अलग रकम की मांग की जाती थी.
उत्तर पुस्तिकाओं को निकालने का भी आरोप
कोर्ट में पेश दस्तावेज में एक और गंभीर बात बताई गई है. इसमें कहा गया है कि आरोपियों द्वारा मूल उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित स्थान से बाहर निकालकर दोबारा लिखवाने या उनमें बदलाव करने की कोशिश की गई. आरोप के मुताबिक, यह काम पैसे के बदले किया जाता था. इसका मतलब यह है कि परीक्षा खत्म होने के बाद भी कथित तौर पर कुछ उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच बनाने और उनमें बदलाव करने की कोशिश की गई. सीआईडी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि ऐसी उत्तर पुस्तिकाएं कौन-सी थीं, उन्हें किसने संभाला और सुरक्षित स्थान से बाहर निकालने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे.
जांच में अभ्यर्थियों से संबंधित एक और चौंकाने वाली बात सामने आने का दावा किया गया है. दस्तावेज के अनुसार, कथित तौर पर अभ्यर्थियों से मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कैंसिल चेक, हस्ताक्षर किए हुए खाली स्टांप पेपर और खाली हस्ताक्षर किए हुए A-4 पेपर लिए जाते थे. इन दस्तावेजों का इस्तेमाल पैसे की लेन-देन को सुरक्षित रखने या अभ्यर्थियों पर दबाव बनाने के लिए किए जाने की बात सामने आ रही है.
लखनऊ से चल रहा था ‘सीक्रेट सेल’?
जांच में परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के लखनऊ स्थित कार्यालय की भूमिका भी सामने आई है. दस्तावेज में लखनऊ के FF-67, आदर्श कॉम्प्लेक्स, जानकीपुरम स्थित इस एजेंसी के कार्यालय का उल्लेख किया गया है. आरोप है कि कंपनी के निदेशक सत्यपाल, रणवीर तथा कर्मचारियों मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद अवध के साथ मिलकर परीक्षा में कथित धोखाधड़ी के लिए एक ‘सीक्रेट सेल’ चलाया जा रहा था.
