झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई.
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में झारखंड सरकार नियुक्ति नियमावली की कानूनी वैधता पर अपना जवाब दाखिल करे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 09 अक्तूबर को होगी.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने झारखंड सरकार द्वारा बनाए गए डीजीपी नियुक्ति के नियमों को गलत बताया.
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से इस मामले पर 30 सितंबर को ही अगली सुनवाई करने का आग्रह किया.
बाबूलाल ने कहा, अच्छा होगा खुद पद छोड़ें
इधर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया मामले को एक्स पर डीजीपी से कहा है कि अदालत के फ़ैसले का इंतजार करने के बजाय अपनी एवं राज्य सरकार की और किरकिरी से बचने के लिए उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए.
मरांडी ने कहा, अदालत ने साफ कहा कि डीजीपी की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों से संचालित होती है और हर राज्य को यह बताना होगा कि उसने उन निर्णयों का पालन किया है या नहीं. पीठ ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि पुलिस अधिनियम के तहत डीजीपी नियुक्ति के नियम बनाने का कानूनी आधार आखिर क्या है. सरकार को अपने फैसले का कानूनी आधार स्पष्ट करना होगा. इसलिए इस्तीफा देना ही अच्छा होगा.
इसपर कपिल सिब्बल ने कहा कि वह 30 को उपलब्ध नहीं हैं. मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड के मद्दे पर एमिकस क्यूरी की मदद की जरूरत बतायी. लेकिन एमिकस क्यूरी राजू राम चंद्रन ने कहा कि वह अगले हफ्ते उपलब्ध नहीं है. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए नौ अक्तूबर की तिथि निर्धारित की.
