रांचीः राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रण झा की हार के बाद महागठबंधन में मचे रार के बीच झारखंड कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है. नेताओं ने कहा है कि महागठबंधन की मजबूती के लिए कांग्रेस विष पीने को भी तैयार है.
इसके साथ ही नेताओं ने कांग्रेस के प्रभारी के राजू का बचाव किया. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू द्वारा राजद और माले पर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के लगाए गए आरोप के बाद राजद और माले ने कांग्रेस पर पलटवार किया था.
इसे लेकर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और पार्टी के कई मंत्री विधायकों ने एक प्रेस कांफ्रेंस में अपना पक्ष रखा.
कांग्रेस विधायकों ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने पूरी एकजुटता, अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन बिना किसी तथ्य और प्रमाण के कांग्रेस विधायकों की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
केशव महतो कमलेश ने कहा कि चुनाव मे पैसे का खेल हुआ. भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को आखिर छह अतिरिक्त वोट कहां से आए. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के साथ विश्वासघात और धोखा होने का आरोप भी लगाया.
उन्होंने कहा कि हार का विश्लेषण किया जा रहा है. हमारे प्रभारी के राजू एक ईमानदार और सफल राजनीतिज्ञ हैं. सहयोगी दलों को उनके खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए.
प्रदीप यादव ने भी कहा कि के राजू पर उंगली नहीं उठाया जा सकता. चूक हुई है और अब चूक पर चर्चा नहीं चिंता की जानी चाहिए.
राधाकृष्ण किशोर ने भी कहा कि हमारे 56 विधायक थे. दोनों सीटें जीतनी चाहिए थी. यह कांग्रेस नहीं महागठबंधन की हार है. लेकिन राज्यसभा की एक सीट पर हार का मतलब हम झारखंड नहीं हारे हैं. कोई भी कप्तान परिणाम देखने के बाद भावावेश में बोल जाता है, इसी रूप में के राजू के बयान को देखा जाना चाहिए. वह एक कुशल और ईमानदार राजनेता हैं. कांग्रेस महागठबंधन की मजबूती के लिए विष पीने को भी तैयार है.
