झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर सीआइडी के छापे के तुरंत बाद चैयरमैन पद से इस्तीफा देने वाले एल खियांग्ते ने स्पष्ट किया है कि उन पर कोई दबाव नहीं था, बल्कि वह आयोग से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के मकसद से अपना पद छोड़ा.
उन्होंने कहागै कि सीआईडी जांच शुरू होने के बाद उन्हें लगा कि जांच एजेंसी को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, इसलिए उन्होंने स्वयं पद छोड़ने का फैसला किया.
आमतौर पर मीडिया से बात करने से परहेज करनेवाले खियांग्ते ने पहली बार इस्तीफे पर अपनी बात मीडिया के समक्ष रखी
ख्यांग्ते ने कहा कि जेपीएससी में सीआइडी की जांच शुरू होते हुए उन्हें लगा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए उनपर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। इस कारण उन्होंने सबसे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के लिए उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था. उन्होंने कहा, ‘किसी दबाव में काम करना मेरी कार्यशैली नहीं है. अब मैं जांच एजेंसी को पूरा सहयोग करूंगा.’
सोशल मीडिया पर पद बेचने जैसे आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, यदि ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो जांच एजेंसी को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के सवाल पर क्या कहा
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उन पर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के साथ मिलकर परीक्षा कराने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि कोई भी व्यक्ति ऐसी एजेंसी के साथ काम नहीं करना चाहता. उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी को काम देने से पहले उसके ब्लैकलिस्टेड होने या नहीं होने की पूरी जांच की गई थी. उसकी क्षमता और संसाधनों का आकलन करने के बाद ही उसे कार्य सौंपा गया.
ओएमआर शीट का सच एजेंसी ही बताएगी
14वीं सिविल सेवा परीक्षा की ओएमआर शीट को लेकर उठ रहे सवालों पर एल ख्यांग्ते ने कहा कि आयोग के नियम के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के बाद अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी दी जाती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ओएमआर शीट के बारे में संबंधित एजेंसी ही जांच के बाद सही जानकारी दे सकती है. आयोग ने भी इस संबंध में एजेंसी को आवश्यक सूचना उपलब्ध करा दी है.
सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं
पीटी परिणाम में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के विवाद पर उन्होंने कहा कि जेपीएससी के नियमों में स्क्रूटनी के दौरान सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के सदस्यों की भूमिका अंतिम मेरिट सूची, स्क्रूटनी और साक्षात्कार के चरण में होती है.
पीटी में कटऑफ जारी करने का नियम नहीं
एल खियांग्ते ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के साथ कटऑफ अंक जारी करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है. उन्होंने बताया कि पहले भी कभी कटऑफ जारी किया गया और कभी नहीं. नियम के अनुसार अंतिम परिणाम के समय कटऑफ और आरक्षण संबंधी विवरण जारी किया जाता है.
छवि सुधारने के लिए किए प्रयास
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पद संभालने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने का लक्ष्य तय किया था. इसके लिए नियमों में बदलाव और सुधार की दिशा में भी पहल की गई थी. उनका मानना है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियों को छोड़कर अधिकतम सूचनाएं सार्वजनिक होनी चाहिए.
