रांचीः कांग्रेस की नेता और झारखंड सरकार में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने आंदोलन के दौरान सरकार से वार्ता के लिए छात्रों के डेलीगेशन पर दिए गए अपने बयान पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.
वे शुक्रवार को मीडिया से बात कर रही थीं. मंत्री ने कहा, ” JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच से हमारे संदर्भ में एक बयान दिया गया है. मुझे लगता है कि छात्र नेता रविंद्र पासवान मेरी कही बातों को को सही ढंग से समझ नहीं पाए हैं. सोशल मीडिया पर भी हमने देखा है कि हमारे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है.”
उन्होंने बताया कि 12 अगस्त को जब वे सदर अस्पताल गई थीं, जहां उन्होंने घायल अनशनकारियों से मुलाकात की थी. इस दौरान जो उनकी बातचीत हुई, वहीं उन्होंने मीडिया को बताया था।
उन्होंने कहा, “मैं फिर से इस बात को दोहरा रही हूं कि 12 तारीख को मैंने मीडिया के सामने जो बयान दिया था, उसमें स्पष्ट था कि जिन छात्र-छात्राओं का प्रतिनिधिमंडल सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मिलने गया, उसमें एक भी अनशनकारी को शामिल नहीं किया गया था.”
मंत्री शिल्पी नेहा ने कहा कि उनकी चिंता यही है कि मंत्रियों की कमेटी से वार्ता में शामिल उस प्रतिनिधिमंडल में अनशन पर बैठे छात्र रहते तो सरकार उनसे बातचीत करके कम से कम उनके अनशन को तुड़वाने का काम करती. उनका स्वास्थ्य बेहतर हो पाता, लेकिन उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं किया गया. कम से कम अनशन पर बैठे छात्रों के साथ सरकार को वार्ता करने का मौका मिलता।
उन्होंने कहा कि इस बयान को इस तरह से पेश किया गया कि जैसे उन्होंने कहा है कि ‘प्रतिनिधिमंडल में कोई छात्र नहीं थे’. मंत्री ने कहा, “मैं इस बात की खंडन करती हूं.”
मंत्री के बयान का विरोध
छात्र नेता रवींद्र पासवान ने मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के बयान पर कहा, “उनसे हम यही पूछ रहे हैं कि आपको कैसे पता चला कि हम छात्र नहीं हैं. हमारा जो प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए गया था, हम सभी का एडमिट कार्ड दिखा सकते हैं. बिना परखे, बिना सोचे-समझे इस तरह का बयान देना गलत है. सभी के पास एडमिट कार्ड है और सभी JPSC-JSSC परीक्षा लिखते हैं.”
