रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ 23 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में रांची. पहुंचीं. उन्होंने छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों को सुना.
कुनिका सदानंद ने बताया कि वह कई दिनों से मुंबई से झारखंड के छात्र आंदोलन को फॉलो कर रही थीं. झारखंड आने के बाद उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनकी मेहमाननवाजी की, उनसे भी उन्होंने कहा कि वह छात्रों के प्रदर्शन में जरूर जाना चाहती हैं. इसके बाद वह आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और छात्रों से बातचीत की.
गंभीरता से सुना जाना चाहिए
कुणिका सदानंद ने कहा कि नौकरी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों के साथ संवाद कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए.
कुनिका सदानंद ने कहा, “झारखंड सरकार केंद्र सरकार की तुलना में अधिक संवेदनशील है. ऐसे में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के जरिये समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार छात्रों को 10 से 15 दिन का समय देकर उनकी मांगों पर ठोस तरीके से विचार करे. उनका कहना था कि आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय सरकार को परिणाम निकालने की दिशा में काम करना चाहिए.”
कुनिका सदानंद ने जांच एजेंसी को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि छात्र यदि मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, तो व्यक्तिगत रूप से उनका मानना है कि सरकार को इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए जांच करवानी चाहिए. इससे पूरे मामले की निष्पक्षता को लेकर छात्रों के बीच विश्वास पैदा हो सकता है.
झारखंड के सवाल अलग हैं
कुनिका सदानंद ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है. विद्यार्थियों को पढ़ाई का बेहतर माहौल और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता मिलनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि झारखंड और दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलनों की परिस्थितियां अलग हैं. दिल्ली में पेपर लीक का मामला सामने आया था, जबकि झारखंड में छात्र मुख्य रूप से नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी या नकल से संबंधित आरोप सामने आए हैं तो सरकार को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए.
वेकैंसी की व्यवस्था पर सवाल
सदानंद ने सरकारी नौकरियों की बड़ी संख्या में एक साथ रिक्तियां जारी करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा, उनकी राय में एक साथ बड़ी संख्या में वैकेंसी घोषित करने के बजाय नियमित तरीके से नियुक्तियों की प्रक्रिया होनी चाहिए.
उन्होंने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में पद एक साथ घोषित होने पर भ्रष्टाचार या राजनीतिक दबाव की गुंजाइश बढ़ सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल या हर महीने उपलब्ध रिक्तियों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए.
