अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में बुधवार को छपी एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सवालों की झड़ी लगा दी.
राहुल गांधी ने इस दौरान दावा किया कि वो लगातार तीन सालों से सुबूत के साथ ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते रहे हैं और अब दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है.
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने इस दौरान फ़रवरी 2025 से लेकर अब तक उन प्रेस कॉन्फ़्रेंस और कार्यक्रमों का ज़िक्र किया जब-जब उन्होंने कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया था.
एंटी-इनकंबेंसी ही ख़त्म हो गई
उन्होंने कहा कि हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी, जैसे राज्यों में हमेशा चुनावों के बाद सरकारें बदलती थीं लेकिन अचानक चुनावों में एंटी-इनकंबेंसी ही ख़त्म हो गई.
उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूं और मैंने 50 से ज़्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताए हैं. लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता. क्योंकि भारत में ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ नाराज़गी) नाम की एक बुनियादी ताक़त होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को नहीं बख़्शती.”
इंदिरा गांधी की चर्चा
“इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीतती हैं, अपनी लोकप्रियता के शिखर पर होती हैं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही ज़बरदस्त एंटी-इनकंबेंसी और भारी दबाव का सामना करना पड़ता है.”
उन्होंने कहा, “एक के बाद एक, कई नेताओं के साथ ठीक यही होता है. ऐसा कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ होता है, लेकिन किसी वजह से, नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा कभी नहीं होता. अमित शाह के साथ ऐसा नहीं होता, बीजेपी के साथ ऐसा नहीं होता.”
वोट तबाह होंगे, तो संविधान तबाह होगा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, “हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पॉलिटिकल फ़ोर्स कहां गायब हो गई है. इसके हम जवाब ढूंढ रहे थे और आख़िर हमें इसका जवाब मिला. वोट हमारे देश की बुनियाद है. वोट जिसे चुनाव आयोग सुरक्षित रखता है. इसे संविधान से ताक़त मिलती है. अगर वोट तबाह हो रहे हैं तो हमारा संविधान तबाह होगा. अगर संविधान तबाह होता है तो हमारे क़ानून ख़त्म हो जाएंगे और संस्थानों का कोई मतलब नहीं रहेगा. ये हमारे वोट पर हमला है. ये हर नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है. हम लगातार कह रहे हैं कि वोट के साथ कोई न कोई दिक्कत है. चुनाव आयोग इसको सुरक्षित रखता है.”
राहुल गांधी ने सवाल खड़े करते हुए कहा, “इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता के शिखर पर भी चुनाव हारीं लेकिन बीते कई चुनावों के बाद ‘एंटी-इनकंबेंसी’ जैसे ख़त्म सी हो गई है.
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा कि लोकतंत्र को बर्बाद नहीं होने देना है. साथ ही राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से मांग करते हुए कहा कि वो सरकार गवाह बन जाएं.”
यह छोटी-मोटी धांधली नहीं है
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा मांगते हुए कहा, “कृपया समझें कि यहां क्या हो रहा है. आपने जो किया है, वह भारतीय राष्ट्र के ख़िलाफ़ एक काम है. यह चुनाव में कोई छोटी-मोटी धांधली नहीं है. यह भारत के संविधान पर हमला है, यह हमारे देश के कानूनी ढांचे पर हमला है, और आप ही वह व्यक्ति थे जिन्हें यह सुनिश्चित करना था कि वोट सुरक्षित रहें.”
“हम भारत में लोकतंत्र को ख़त्म नहीं होने देंगे. और जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें सज़ा ज़रूर मिलेगी- आज नहीं तो कल या परसों. उन्हें सज़ा मिलेगी ही. ज्ञानेश कुमार को अपनी मौजूदा स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए.”
गौरतलब है कि अंग्रेज़ी अख़बार की एक खोजी रिपोर्ट के छपने के बाद विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार और केंद्रीय चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
अख़बार की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों को लेकर ’10 महीने में 14 बार आपत्ति’ दर्ज कराई.
