रांची– झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज कराए गए मामले में प्रतिवादी हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने में देरी पर नाराजगी जतायी है.
इसके साथ ही प्रतिवादी पक्ष पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है.
जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने जवाब के लिए समय मांगे जाने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रतिवादी पक्ष तय समय-सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करें.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की है.
क्या है पूरा मामला?
सीएम हेमंत सोरेन ने तत्कालीन ईडी के अधिकारी कपिल राज और अन्य पर एससी-एसटी केस किया था. इस केस के खिलाफ ईडी अधिकारी ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
अपनी एफआईआर में सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर आदिवासी होने के कारण उन्हें परेशान करने और आम जनता की नजरों में उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का आरोप लगाया था.
सोरेन ने आरोप लगाया था कि ईडी ने 27 जनवरी, 2024 को उनकी छवि खराब करने के लिए शांतिनिकेतन स्थित उनके आवास और दिल्ली के झारखंड भवन में तलाशी ली थी.
इसके बाद ईडी के अधिकारियों ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत शुरू की गई एफआईआर और कार्यवाही को चुनौती देते हुए झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया और उन्हें रद्द करने की मांग की।
इसी मामले में हाईकोर्ट के पूर्व के निर्देश के तहत अधिकारियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर पहले से ही रोक जारी है.
