रामगढ़ः पति की मौत के बाद जिंदगी में मुश्किलों से सामना हुआ, तो लगा संभलना कठिन है. लेकिन हिम्मत नहीं हारी. सामने दो छोटे बच्चों के चेहरे हैं. उनकी परवरिश तो करनी ही पड़ेगी. पता चला कि जिले में होमगार्ड की बहाली होने वाली है. इसके लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा पास करनी होगी. अभावों में गुजरती जिंदगी के बीच दौड़ के लिए रोज सुबह मैदान नापती हूं. साड़ी में और नंगे पांव यह अभ्यास आसान नहीं होता, पर हौसला कायम है. देखें आगे क्या होता है. अगर चौकीदारी मिल गई, तो बच्चों को पढ़ाने-बढ़ाने का सपना भी थोड़ा आसान हो सकेगा.
कविता एक सांस से यह सब कहती हैं क्षण भर के लिए खामोश हो जाती हैं. उनकी आंखें शून्य में ताकती हैं.
उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वे साड़ी पहने नंगे पांव दौड़ती नजर आ रही हैं.
इसके बाद उन्हें ट्रैकशूट, जूते और अन्य जरूरी सामान की मदद की गई है. कई नेता और सामाजिक प्रतिनिधि उनसे बातें कर हौसला बढ़ा रहे हैं.
पति की मौत के बाद
कविता रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड स्थित सोसो गांव की निवासी हैं. करीब तीन वर्ष पूर्व बीमारी के कारण पति की मौत के बाद, अपने दो बच्चों का भविष्य संवारने के लिए वे खुद अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हैं. अभी वे मजदूरी कर घर का खर्च जुटाती हैं.
होमगार्ड की बहाली है
झारखंड के रामगढ़ जिले में 284 पदों पर होमगार्ड जवानों की बहाली होनी है. इसके लिए 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक बहाली की प्रक्रिया प्रस्तावित है. बहाली में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटों का प्रावधान है. जबकि विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इससे कविता की उम्मीदें बढ़ी हैं.

ट्रायल रन के दौरान वीडियो वायरल
बहाली की शारीरिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले में एक एकेडमी की ओर से शहर के बाजार टांड़ स्थित सिद्धो कान्हो स्टेडियम परिसर में चार अक्टूबर को 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल कराया गया था. इसमें महिला और पुरुष अभ्यर्थियों ने हिस्सा लेकर अपनी तैयारी को परखा.
सोसो गांव निवासी कविता देवी भी दौड़ में शामिल हुई थीं. वे साड़ी में ही नंगे पांव दौड़ीं औरप 6 मिनट 45 सेकेंड में 1600 मीटर कवर किया.
यह देखकर वहां मौजूद लोगों और वॉलंटियर का ध्यान सहज ही, साड़ी पहने और नंगे पैर दौड़ रही कविता पर गया और कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
दौड़ समाप्त होने के बाद कविता की लगन को देखकर एकेडमी के संचालक अंकित अग्रवाल व अन्य लोग उनके घर पहुंचे और उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप जर्सी, जूते आदि प्रदान किए.
इसके अलावा अन्य लोगों ने भी कविता को खेल सामग्री प्रदान की, ताकि उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने में किसी तरह की परेशानी न हो. ट्रैकशूट, जूते मिलने के बाद कविता के हौसले बढ़े हैं. उन्होंने अभ्यास का समय
और भी महिलाएं अभ्यास कर रहीं
इसी इलाके की जगेश्वरी कुमारी (35) भी साड़ी पहनकर दौड़कर अभ्यास कर रही हैं. उन्होंने बताया कि और भी कई महिलाएं है, जो शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी कर रही हैं. सुबह में सभी जल्दी ही पहुंचतीं हैं. वहां अभ्यास करने के बाद घर का काम निपटाती हैं.
इनके अलावा गांवों की कई गृहिणियां और महिलाएं होमगार्ड की नौकरी पाने के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए निर्धारित टाइमिंग में दौड़ पूरा करने का अभ्यास कर रही हैं.
दौड़ पूरा करने का अभ्यास कर रहीं बूढ़ा-खुखरा गांव की निवासी सुनीता (35) कहती हैं- “मैं एक गरीब किसान परिवार से हूं। मेरे पति ‘ट्रैक सूट’, ‘टी-शर्ट’ और जूते खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते हैं.”
