रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की अलग-अलग परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने के रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट सौंपी. कोर्ट ने संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) नियुक्ति परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा के विज्ञापन रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की है. साथ ही प्रार्थियों और राज्य सरकार को बहस की शॉर्ट रिटेन नोट दाखिल करने की अनुमति दी.
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में मामले की सुनवाई दोपहर 2:15 बजे शुरू हुई और 3 बजे समाप्त हो गई.
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहितश्य राय ने पक्ष रखा. वहीं, प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से भी दलीलें पेश की गईं. राज्य सरकार ने अपनी बहस पूरी की. इसके बाद अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
सरकार ने बताया, पूरी परीक्षा प्रणाली के धोखाधड़ी से दूषित होने का है
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि यह मामला किसी व्यक्तिगत कदाचार का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के धोखाधड़ी से दूषित होने का है. जब परीक्षा कराने वाली एजेंसी ही भ्रष्ट हो, तो अलग-अलग उम्मीदवारों को नोटिस देने की जरूरत नहीं होती. सीआइडी जांच में पता चला कि ओएमआर शीट में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ की गई.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में भी गड़बड़ी हुई. आरोप है कि तत्कालीन नियंत्रक ने वाट्सएप के जरिए आंसर-की भेजी. परीक्षा में कई साल्वर गैंग का इस्तेमाल किया गया और अभ्यर्थियों की अदला-बदली की गई. राज्य सरकार ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्तिगत कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया के रद करने का है.
जब परीक्षा कराने वाली एजेंसी ही भ्रष्ट हो और अध्यक्ष सबूत नष्ट करे, तो पूरी चयन प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है. सरकार ने कहा कि जनहित में यह जरूरी है कि दूषित परीक्षा प्रक्रिया से चयनित उम्मीदवारों को सिविल सेवा में न रखा जाए. सरकार ने कहा कि नई परीक्षा कराना और स्वच्छ एजेंसी के माध्यम से चयन करना संवैधानिक रूप से उचित रास्ता है.
रद्द करने के फैसले को चुनौती
इन याचिकाओं में राज्य सरकार की ओर से विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है. प्रार्थियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए अदालत से राहत देने का आग्रह किया है.
मामला जेपीएससी की संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ा है. इन परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
CDPO परीक्षा रद्द करने को लेकर
प्रार्थी सुभाष मुर्मू और अन्य की ओर से याचिका दायर कर सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिका में सरकार की ओर से जारी अधिसूचना पर सवाल उठाये गए हैं. प्रार्थियों ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है.
11वीं-13वीं परीक्षा का मामला भी
प्रार्थी दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य की ओर से जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने संबंधी अधिसूचना को चुनौती दी गई है. यह मामला भी सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था. प्रार्थियों की ओर से सरकार के फैसले के खिलाफ अपना पक्ष रखा गया. अब अदालत के फैसले से इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी.
फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा पर
प्रार्थी सौरभ सिंह और अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है. इस मामले को भी अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई के दौरान रखा गया. राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इन मामलों में फैसला सुरक्षित रख लिया.
अपील याचिकाओं से जोड़ने की मांग खारिज
उधर, इन रिट याचिकाओं को संबंधित अपील याचिकाओं के साथ टैग करने की मांग को लेकर दायर विशेष मेंशन को चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खारिज कर दिया.
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने जेएसएसी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.
