रांचीः भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते के विरुद्ध गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होने के संकेत साफ है कि जांच एजेंसी फ्रेंडली मैच खेल रही है और सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर रही है. इसलिए पूछताछ की बजाय पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो.
प्रतुल ने कहा कि पूरे आयोग पर गंभीर आरोप लगे हैं. सभी सदस्यों को बर्खास्त कर पारदर्शी तरीके से नई नियुक्तियां होनी चाहिए।
पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार के साढ़े छह वर्षों का कार्यकाल में युवाओं के सपनों की हत्या, प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनियमितता और भर्ती घोटालों का इतिहास बन गया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हेमंत सरकार के साढ़े छह वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए।.राज्य के शिक्षा मंत्री यानी मुख्यमंत्री को अविलंब इस्तीफा देना चाहिए.
प्रतुल ने कहा कि जब तक आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से रिमांड में कड़ाई से पूछताछ नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा.
गलत तरीके से परीक्षा एजेंसी को काम दिए
उन्होंने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 315, 316 एवं विशेष रूप से अनुच्छेद 320 स्पष्ट करते हैं कि निजी एजेंसी को केवल तकनीकी एवं सहायक कार्यों के लिए सीमित रूप से लगाया जा सकता है. परीक्षा का संचालन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करना तथा अंतिम चयन करना झारखंड लोक सेवा आयोग का मूल संवैधानिक एवं वैधानिक दायित्व है. इन अधिकारों का किसी निजी कंपनी को हस्तांतरण कानून और संविधान—दोनों की भावना के विपरीत है.उन्होंने कहा कि यदि निजी एजेंसियों को आयोग के मूल अधिकारों में हस्तक्षेप करने दिया गया है, तो यह केवल प्रक्रिया की त्रुटि नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है.
