झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि झारखंड का नियम पहली नजर में ‘प्रकाश सिंह’ मामले में तय किए गए कानून के सीधे खिलाफ़ लगता है. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल नियुक्ति रद्द करने से इनकार करते हुए डीजीपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार दिया है.
लाइव लॉ के मुताबिक कोर्ट ने कहा है, “अगर यह नियम रद्द किया जाता है, तो झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को भी रद्द करना पड़ सकता है. इसलिए, हमें उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना सही लगता है.”
कोर्ट ने कहा है कि झारखंड उन्हें नोटिस जारी करे ताकि वे पेश हो सकें और कोर्ट की मदद कर सकें. इस बीच, राज्य सरकार उस नियम पर फिर से विचार कर सकती है.
इसके साथ ही इस मामले को एक हफ़्ते बाद के लिए लिस्ट करने को कहा है.
कोर्ट ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार चाहें तो अपना जवाब (काउंटर) दाखिल कर सकती है. साथ ही ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) डीजीपी की नियुक्ति के लिए झारखंड द्वारा बनाए गए नियम की वैधता पर कोर्ट की मदद कर सकते हैं. वह दूसरे राज्यों के कानूनों/नियमों और उनके तहत की गई नियुक्तियों पर भी गौर करेंगे. जबकि संघ लोक सेवा आयोग ( UPSC) इस मामले में एमिकस की मदद करेगा.
तीन सदस्यीय पीठ ने की सुनवाई
मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा.
अदालत के समक्ष डीजीपी की नियुक्ति के लिए झारखंड सरकार की ओर से बनाए गये नियमों की वैधता का मुद्दा उठाया गया.
कपिल सिब्बल और एसजी की दलीलें
इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही नियम हैं, तो केंद्र सरकार की ओर से (जिसका प्रतिनिधित्व SG तुषार मेहता कर रहे हैं) सिर्फ़ झारखंड के नियमों को ही क्यों चुनौती दी जा रही है? सिब्बल ने कहा, “दूसरे राज्यों में इससे भी बुरे नियम हैं.”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील पेश करते हुए कहा, इसका मतलब है कि वे (सिब्बल) मानते हैं कि झारखंड के नियम बुरे हैं. केंद्र सरकार राज्यों को चुन-चुनकर निशाना नहीं बनाती. अगर दूसरे राज्यों में भी ऐसे कानून हैं, तो उन्हें भी खत्म किया जाना चाहिए. केंद्र सरकार राज्य को लगातार लिखती रही कि आप प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं.
प्रकाश सिंह केस
प्रकाश सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार,डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए किसी अधिकारी की कम से कम छह महीने की बची हुई सर्विस होनी चाहिए. और जो यूपीएससी द्वारा सुझाए गए पैनल में शामिल हो.
झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर, 2025 को मिश्रा को डीजीपी के रूप में नियुक्त किया है, जबकि वह अगले दिन ही सेवानिवृत्त होने वाली थीं.
केंद्र सरकार ने झारखंड के डीजीपी के रूप में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का हवाला दिया गया है. याचिका में उस 2025 के नियम की वैधता को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत यह नियुक्ति की गई थी, और अनुराग गुप्ता की पिछली नियुक्ति पर भी चिंता जताई गई है.
