रांची झारखंड हाईकोर्ट ने खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में वर्ष 2013 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में झामुमो के पूर्व विधायक पौलुस सुरीन और नक्सली जेठा कच्छप को बरी कर दिया है.
हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को निरस्त करते हुए आरोपियों को बड़ी राहत दी है.
यह मामला वर्ष 2013 का है. खूंटी जिले के तोरपा थाना क्षेत्र में पुलिस के कथित मुखबिर भूषण सिंह और राम गोविंद की हत्या कर दी गई थी.
घटना के बाद पुलिस ने झामुमो के तत्कालीन विधायक पौलुस सुरिन, नक्सली जेठा कच्छप, कृष्णा महतो तथा तीन महिलाओं समेत कुल छह लोगों को आरोपी बनाया था. सभी आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमा चला.
हत्या के संबंध में कर्रा थाना में कांड संख्या-27/2013 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.
निचली अदालत में उम्रकैद की सजा
मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने पौलुस सुरीन और जेठा कच्छप को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. अदालत ने पूर्व विधायक पौलुस पर 25 हजार का जुर्माना और नक्सली जेठा पर 45 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था.
जबकि अदालत ने इस केस में कृष्णा महतो व तीन महिला आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में पहले ही बरी कर दिया था.
इस फैसले को चुनौती देते हुए पौलुस सुरीन ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.
खंडपीठ ने पलटा फैसला
मामले की सुनवाई जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब फैसला सुनाते हुए खंडपीठ ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त कर दिया और आरोपियों को बरी कर दिया.
